सिद्धार्थनगर। इटवा थाना क्षेत्र के दुफेड़िया गांव निवासी एक युवक की दो दिन पहले मुंबई में मौत हो गई। डेढ़ माह पहले गांव में हुए विवाद और चोट लगने से मौत का कारण बताते हुए परिजन शनिवार सुबह इटवा थाने पर पहुंचकर मुंबई से आ रहे शव वाहन को थाने के सामने आधा घंटे तक रोक दिया और हत्या का केस दर्ज करने की मांग करने लगे। वहीं, पुलिस मुंबई के चिकित्सक की ओर से मौत का कारण बीमारी बताए जाने पर कार्रवाई से इनकार कर दिया। उसका कहना था कि मारपीट का केस दर्ज तत्काल दर्ज हुआ था। मेडिकल भी हुआ था। इसलिए गलत केस दर्ज नहीं होगा। समझाने के बाद परिजन शव को घर लेकर गए। वहां छोड़कर फिर थाने पर पहुंच गए। शाम चार बजे तक पंचायत चली। इसके बाद समझाने पर माने और अंतिम संस्कार कर दिया।
क्षेत्र के दुफेड़िया गांव निवासी सोनी यादव पत्नी सुजीत यादव ने 12 जून को इटवा थाने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पट्टीदार रामू यादव, श्यामू यादव, राम धनी यादव व इलायची देबी पत्नी कल्लू यादव ने उसे व उसके पति सुजीत यादव व जेठ वीरू यादव को लाठी डंडे से पीटकर घायल कर दिए है। मिले तहरीर के आधार पर इटवा पुलिस ने मारपीट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर घायलों को इलाज के लिए सीएचसी इटवा में भर्ती करा दिया था। इलाज के बाद सुजीत यादव मुंबई चला गया। जहां वह बीमार होने पर वही के किसी चिकित्सालय में भर्ती था। जहां 27 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराकर लाश परिजनों को सौंप दिया। जहां से लाश के दुफेडिय़ा गांव पहुंचने से पहले ही इटवा थाने के सामने शव वाहन को रोकवा दिया। इसके बाद हत्या का केस दर्ज करने के बाद वहां से वाहन ले जाने पर अड़ गए।
सीओ जयराम व एसओ विजय बहादुर सिंह के समझाने पर भी वह अंतिम संस्कार करने की बात कहकर अपने घर चले गए। लेकिन वहां फिर हत्या का केस दर्ज करने की मांग करने लगे। मांग पूरी नहीं होते तक शव घर पर ही रखे रहने और अंतिम संस्कार नहीं करने की धमकी देने लगे। फिर लाश को घर छोड़कर थाने पर पहुंच गए। यहां शाम चार बजे तक मान मनौव्वल चला। अंत में पुलिस के समझाने बुझाने पर परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। इस संबंध में एसओ विजय बहादुर सिंह का कहना है कि मृतक के परिजनों के दिए गए मेडिकल रिपोर्ट में मृतक वहां अन्य बीमारी के चलते भर्ती था। उसकी मौत से झगड़े में हुई मारपीट से कोई वास्ता सरोकार नहीं था।