सिद्धार्थनगर। गेहूं की बुवाई के मुख्य सीजन पर डीएपी का अकाल पड़ गया है। सरकारी समितियों से डीएपी गायब है। किसानों समितियों का चक्कर काटकर परेशान हैं। प्राइवेट दुकानों से अधिक दाम पर डीएपी खरीदना किसानों की विवशता बन गई है। जिम्मेदार इससे बेखबर बने हुए हैं।
धान व गेहूं जिले के किसानों की मुख्य फसल है। अधिकांश किसानों की जीविका, बच्चों की पढ़ाई और शादी सब कुछ खेती पर ही निर्भर है। मगर हर बार खेती के मुख्य सीजन पर किसान किसी न किसी समस्या से जूझता आ रहा है। जिले में गेहूं की बुवाई जोरों पर है। बुवाई के एन मौके पर जिले में सरकारी समितियों से डीएपी गायब है। सरकार की ओर से समितियों पर इफको व आईपीएल की सप्लाई होती है। जिले के किसानों का इन दोनों ब्रांड की डीएपी पर भरोसा भी रहता है, मगर इस बार बुवाई में किसान समितियों का चक्कर लगाकर परेशान हैं। एक भी समिति पर डीएपी नहीं है। किसान हर दिन समिति से निराश लौट रहे हैं।
जोगिया क्षेत्र के किसान भारत प्रसाद, ज्ञानदास यादव, विजय कुमार पांडेय, रूद्रनरायन, सुरेंद्र कुमार, फूलचंद, रामकुमार आदि किसानों का कहना है कि जब समिति पर पहुंचते हैं तो यही कहा जाता है कि आज आएगा-कल आएगा। पिछले 20 दिनों से किसी भी समिति पर डीएपी नहीं आया है। मजबूर होकर 1250 रुपये प्रति बोरी खाद खरीद रहे हैं। वह भी खेत में काम करेगा कि नहीं इसका भरोसा नहीं। इस संबंध उप निदेशक कृषि डॉ.पीके कन्नौजिया ने बताया कि डीएपी के लिए डिमांड भेजी गई थी, दो दिनों के भीतर जिले के सभी समितियों पर खाद उपलब्ध करा दिया जाएगा। रही बात मिलावटी की तो टीमें लगातार जांच कर रही है। पकड़े जाने पर कार्रवाई भी की जा रही है।