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गायों को लंपी स्कीन डिजीज के चपेट में आने का जोखिम

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गायों को लंपी स्कीन डिजीज के चपेट में आने का जोखिम
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- बलरामपुर व गोंडा में केस मिलने के कारण जिले में सतर्क हुआ पशुपालन विभाग
- राजस्थान, पंजाब व गुजरात सहित कई राज्यों में तबाही मचा चुकी है यह बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बरसात के मौसम में गायों को लंपी स्कीन डिजीज की चपेट में आने का जोखिम बढ़ गया है। यह वायरल बीमारी है। समीपवर्ती जिले बलरामपुर व गोंडा में इस बीमारी के केस मिलने के कारण पुशपालन विभाग सतर्क हो गया है। पशु चिकित्साधिकारी गांवों में पैनी नजर बनाए हुए हैं, जबकि किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार लंपी स्कीन डिजीज की चपेट में आने से पशु की खाल में गांठें बन जाती है। उसे बुखार हो जाता है और कमजोरी के कारण पशुओं का दूध कम हो जाता है।
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इस बीमारी की चपेट में आने से गर्भपात व बांझपन की समस्या भी आती है। कभी-कभी खाल की गांठ फूट जाने के कारण भी संक्रमण से पशु की बीमारी की मियाद बढ़ जाती है। राजस्थान, पंजाब व गुजरात सहित कई राज्यों में ये बीमारी तबाही मचा चुकी है।
यहीं कारण है कि लंपी स्कीन डिजीज के लिए जिला पशु चिकित्सक को निर्देश दिया गया है कि इस वायरस से संबंधित एक भी केस मिले तो मुख्यालय को तत्काल सूचना भेज दी जाए। गायों में ही ये बीमारी अधिक होती है।
जिले में गोवंश की संख्या 97,064 है, जबकि भैस की संख्या 1,82,952 है। जहां गोवंश एक साथ चरते हैं, वहां ज्यादा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। एक पशु संक्रमित हुआ तो अन्य पशु भी बीमार हो सकते हैं। इस बीमारी के लिए पशुपालन विभाग ने टीका नहीं बनाया है।
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बरतें ये सतर्कता
गायों के त्वचा में गांठ या बुखार हो तो तत्काल पशु चिकित्सक को दिखाएं।
कोई गाय इस बीमारी की चपेट में आ जाए तो उसे अन्य गायों से अलग रखें।
गाय को लंपी स्क्रीन डिजीज के लक्षण दिखे तो उसके बछड़े को भी उससे अलग रखे।
किसी के घर जानवर बीमार है तो वहां से जाने-आने वाले पशुपालक को सबसे पहले अपना हाथ-पैर साबुन से धोना चाहिए।
लंपी स्कीन डिजीज के लिए अलर्ट जारी किया गया है। पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सक सक्रिय हैं। यह बीमारी गायों में ही अधिक होती है, भैंस को भी हो सकती है। पशुपालकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
- डॉ. एमपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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