चार सौ गंगा ग्रामों में सबसे पहले किया जाएगा जैविक खेती
काला नमक धान के उत्पाद के लिए जाना जाता हैं जिला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के चार सौ गंगा ग्रामों में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की तैयारी शुरू हो गयी है। डीएम डॉ. राजागणपति आर ने जिला गंगा समिति की बैठक में कृषि विभाग को इसके लिए कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। पहले चरण में गंगा ग्राम के 20 फीसदी किसानों को जैविक तरीके से खेती के लिए जागरूक कर प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही यहां के किसानों को प्रोत्साहित जैविक तरीके से कालानमक धान की खेती करने से फसल की अच्छी कीमत मिलेगी।
जिले के विभिन्न नदियों किनारे बसे 400 ग्रामों को गंगा ग्राम घोषित करने के साथ ही यहां रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग पर रोकथाम लगाए जाएंगे। 10 अगस्त को जिला गंगा समिति की बैठक में इन गंगा ग्रामों में जैविक कृषि के प्रोत्साहन के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इसमें कृषि विभाग को कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। जिसमें किसानों को गोष्ठी आदि के माध्यम से जागरूक कर उन्हें जैविक खेती के लिए उपकरणों का प्रबंध करने को भी कहा गया है। जिले में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कालानमक धान की खेती होती है, जैविक विधि से खेती होगी तो कालानमक चावल के स्वाद और सुगंध से किसानों का और लाभ होगा।
डीपीओ गंगा समिति पंकज त्रिपाठी का कहना है कि इसके पहले चरण में प्रत्येक गंगा ग्राम के 20 फीसदी किसानों को जैविक कृषि के लिए प्रोत्साहित कर उनके कृषि उत्पादों को ई-कामर्स के माध्यम से बिक्री कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जैविक खेती करने वाले किसानों को जैविक कृषक की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।
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जैविक विधि से कालानमक धान की खेती करने के लिए सरकार की तरफ से सुविधा मिले तो बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। इससे उत्पादन की अच्छी कीमत मिलने से किसानों की उन्नति होगी।
केशरी पांडेय, किसान
जैविक तरीके से कालानमक के उत्पाद का बाजार में अच्छा मूल्य मिल सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार की तरफ से किसानों को उचित सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत है।
सुनील यादव, अहिरौला
कृषि वैज्ञानिक की राय
जैविक विधि से कालानमक धान की खेती होगी तो 20 से 25 प्रतिशत कीमत अधिक मिलेगी। निर्यात को प्रोत्साहन, मिट्टी की सेहत सुधरेगी, पर्यावरण बेहतर होगा और किसान सहित चावल खाने वाले अन्य लोगों की भी सेहत अच्छी होगी। जैविक विधि से कालानमक धान खेती सिद्धार्थनगर की आवश्यकता है।
-डॉ. आरसी चौधरी, कृषि वैज्ञानिक