राप्ती नदी पर पुल निर्माण के दौरान दशकों पहले पीडब्लूडी की ओर से बनाए गए आवासीय भवन पर कब्जे को लेकर बुधवार को दो पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में जमकर कहासुनी हुई। परस्पर विरोधी राजनीतिक दलों से मामला जुड़ा होने के कारण प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए। तनाव को देखते हुए मौके पर कई थानों की फोर्स पहुंच गई। दिन भर गतिरोध के बावजूद बात नहीं बनी। बाद में एसडीएम ने दोनों पक्षों को भवन पर स्वामित्व संबंधी दस्तावेज 48 घंटे में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कागजात के आधार पर फैसला करने का हवाला दिया।
सत्तर के दशक में नगर की सीमा पर राप्ती नदी में पुल निर्माण के दौरान पीडब्लूडी ने अफसरों के लिए आवासीय भवन का निर्माण कराया था। पुल निर्माण पूरा होने के बाद यह भवन क्षेत्र के दो प्रभावशाली नेताओं ने आवंटित करा लिया। सत्ता में उलटफेर के बीच एक नेता ने इस आवासीय भवन से दूरी बना ली, वहीं, दूसरे ने एक करीबी को रहने के लिए आवास दे दिया, जिसने दूसरे आवासीय क्षेत्र में भी कब्जा फैला लिया। नए राजनीतिक माहौल के बाद लौटे नेता ने मंगलवार को अपने हिस्से का आवास खाली करने को कहा, जिस पर बुधवार की दोपहर तक की मोहलत मांगी गई थी। बुधवार को नेताजी पुन: पहुंचे तो आवास में रह रहा व्यक्ति उस पर हक जताने लगा। उसका कहना था कि जिस क्षेत्र में वह रह रहा है, उसमें नेताजी का हिस्सा नहीं है। इसके समर्थन में उसने दूसरे आवंटी के करीबियों को भी बुला लिया। दोनों पक्षों में इसे लेकर जमकर बहस हुई। गतिरोध बढ़ते देखकर मौके पर डुमरियागंज, पथरा, भवानीगंज और त्रिलोकपुर थाने की पुलिस पहुंच गई। घंटों तनाव की स्थिति बनी रही। मामला सुलझते न देखकर एसडीएम अरुण कुमार राय ने दोनों पक्षों से 48 घंटे में स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर विवादित जगह पर मामला निपटने तक पुलिस बल तैनात कर दिया है। इस संबंध में एसडीएम अरुण कुमार राय ने बताया कि विवादित मकान के दोनों पक्षकारों को एक अप्रैल को 12 बजे तक सभी अभिलेखों और पीडब्लूडी की ओर से आवंटित किए गए कागजात के साथ उपस्थित होने के लिए कहा गया है। कागजात आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।