तहसील प्रशासन के रवैए से क्षुब्ध वृद्धा ने रविवार को आत्मदाह की कोशिश की। मिट्टी का तेल शरीर पर छिड़क लिया, हालांकि आग लगाने से पहले ही ग्रामीणों ने उसे रोक लिया। मामला नाला संबन्धी विवाद का है। वृद्ध व उसके परिजन लंबे समय से मामले को लेकर तहसील प्रशासन के चक्कर लगा रही है, मगर समाधान की बजाए सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। तहसील प्रशासन ने घटना की जानकारी ने इंकार किया है।
इटवा थाना क्षेत्र के चौखड़ा गांव में बच्चन और कल्लू उर्फ करन के बीच कई वर्षों से नाले का विवाद बना हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की ओर नाले होने की बाद कह विवाद करते आ रहे हैं। विवाद तब और गंभीर हो गया, जब पैमाइश के बाद तहसील कर्मचारियों ने नाला कल्लू के मकान के नीचे से बता दिया।
नाले का अस्तित्व बचाने के लिए मकान गिराने की चेतावनी दी है। वहीं कल्लू उर्फ करन का कहना है कि नाला सामने बच्चन के निर्माणाधीन मकान के नीचे है। साजिश के तहत गलत सीमांकन कर तहसील कर्मी उसे परेशान कर रहे हैं।
उसका कहना है कि नाले की जमीन में मकान निर्माण नहीं रोका गया तो जलनिकासी बाधित होगी, जिससे उसके मकान पर खतरा आ जाएगा। इस मामले में उसने तहसील प्रशासन पर कार्रवाई के लिए ज्ञापन भी दिया था। सुनवाई न होने पर शनिवार को आत्मदाह की चेतावनी भी दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रविवार को दोपहर मकान निर्माण रोकवाने की मांग को लेकर करन की मां झिनका देवी (65) ने अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क लिया। वह आग लगाने की कोशिश में थी, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उसे रोक लिया।
कई वर्षों से चल रहे विवाद में पुलिस-प्रशासन की भूमिका से ग्रामीण आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि पैमाइश में नाले अथवा चकरोड की जमीन पर जिस किसी का कब्जा पाया जाए उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, मगर पिछले चार वर्षों से विवाद के समाधान के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
उधर, घटना के संबंध में एसडीएम डुमरियागंज विनय कुमार सिंह ने कहा कि विवाद निपटाने के लिए पैमाइश कराया गया है। फिलहाल आत्मदाह के प्रयास से संबंधित कोई सूचना हमारे पास नहीं है। जानकारी लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।