मंगलवार का सूरज डुमरियागंज के लिए अमंगलकारी खबर लेकर निकला। बस्ती में हुए सड़क हादसे में एक साथ नगर के तीन लोगों की मौत और चार के गंभीर रूप से जख्मी होने की खबर से हर तरफ कोहराम मच गया। पीड़ित परिवारों के पुरुष सदस्य तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। परिवार की महिलाओं को देर शाम शव आने तक यही जानकारी थी कि हादसे में उनके परिजन घायल हुए हैं। सच्चाई का अहसास न हो, इसलिए मोहल्ले के लोग भी शव आने से पहले तक उस ओर जाने से कतराते रहे।
नगर के वार्ड नंबर 12 हबीबुल्लाह नगर निवासी शिवप्रसाद उर्फ फागू (65) की तबीयत खराब थी। उनका इलाज लखनऊ से चल रहा था। पिता के इलाज का जिम्मा बड़ा बेटे रामकिशोर (42) के पास था। करीब एक माह पहले रामकिशोर का पुत्र अमरजीत (8) भी बाइक दुर्घटनाग्रस्त होने से जख्मी हो गया था। उसका इलाज लखनऊ के आईकॉन अस्पताल में चल रहा था। मंगलवार को रामकिशोर पड़ोसी जीतू आर्या की बोलेरो से बेटे अमरजीत, पिता फागू, मां धुरपाती और छोटे भाई रामू (18) को साथ लेकर सुबह पांच बजे घर से निकला था। गाड़ी रोडवेज गली निवासी अजीम खान (27) चला रहा था। बस्ती पहुंचने के बाद जीतू का भाई सोनू भी उसमें सवार हो गया। लोग बीमार के अच्छे इलाज की सूचना का इंतजार कर रहे थे, तभी मौत की खबर पहुंच गई। विक्रमजोत के पास हादसे में रामकिशोर, अजीम खान और सोनू आर्या की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गाड़ी में सवार फागू, धुरपाती, अमरजीत और रामू घायल हो गए। इसमें रामू की हालत ज्यादा गंभीर है। घटना की सूचना से नगर में शोक की लहर दौड़ गई। हर तरफ लोग चर्चा करते दिखे कि आखिर हंसते-खेलते परिवार को किसकी नजर लग गई, जो यह हादसा हो गया। पिता और बेटे का इलाज करवाने जा रहे रामकिशोर ने उन्हीं की आंखों के सामने दम तोड़ दिया। मां और पिता के सामने बेटे की लाश गाड़ी से बाहर निकाली गई। इस संबंध में डुमरियागंज इंस्पेक्टर आरबी सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी है। घटना बेहद दुखद है। मरने वालों के घरवालों की स्थिति देखकर उन्हें हादसे की पूरी जानकारी जानकारी नहीं दी गई है। देर शाम तक लाश घर पहुंचेगी। पोस्टमार्टम के लिए शवों को बस्ती लाया गया है।
मां की दवा लाने जा रहा था सोनू
डुमरियागंज। शायद सोनू को नहीं पता कि मां की दवा के लिए वह जहां जा रहा है, वहां से वह कभी लौटकर नहीं आएगा। सोमवार को एक परीक्षा देने वह बस्ती गया था। रात में वहीं मौसी के घर रुक गया। सोचा था कि मंगलवार की सुबह अपनी गाड़ी से बैठकर लखनऊ जाएगा और मां की दवा लेकर लौट आएगा। मगर नियति ने उसे मां से दूर मौत की गोद में सुला दिया। सोनू दो भाईयों में छोटा था। परिवार में सोनू के माता-पिता के अलावा उसकी भाभी और मासूम भतीजा है। सोनू के घरवालों को उसके मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। बड़ा भाई लाश लेने जाने के कारण उन्हें संभालने के लिए मोहल्ले के लोग वहां मौजूद दिखे।
पिता से जल्द लौटने का वादा कर निकला था अजीम
डुमरियागंज। पांच भाइयों में सबसे छोटा अजीम खान बंटवारे के बाद अपने बुजुर्ग माता-पिता और जवान बहन के साथ रहता था। अजीम ड्राइवरी कर उनका पेट पालने के साथ ही बहन की शादी की जुगत में लगा था। इसके लिए वह हाड़तोड़ मेहनत भी करता था। मगर अजीम को क्या पता कि उसके साथ ऐसी अनहोनी हो जाएगी, जिससे वह सभी से दूर चला जाएगा। मंगलवार की सुबह जब घर से निकला तो पिता अजीजुर्रहमान ने उसे कहीं न जाने के लिए टोका। जवाब में अजीम ने थोड़ी देर में लौट कर आने का वादा किया। बेटे के मौत की खबर सुनकर बुजुर्ग पिता और मां के साथ ही बहन की आंख भी पथरा गई है।