सिद्धार्थनगर। एआरटीओ दफ्तर में की गई छापेमारी के बाद पुलिस की कहानी उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ ली है कि जिन 10 लोगों को हिरासत में लिया गया था। उनके पास से ऐसे कोई कागजात नहीं मिले, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सके। जबकि शुक्रवार की देर शाम पुलिस के अधिकारी यह कहते रहे कि मामले में कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो केवल आरटीओ व एआरटीओ के पास ही रह सकते हैं। ऐसे में अचानक क्लीनचिट दे देना, पुलिस की जांच पर भी सवाल उठा रहा है।
सीओ दिलीप कुमार सिंह के नेतृत्व में स्वाट, सदर व उसका थाने की पुलिस ने शुक्रवार को दिन में 11 बजे के करीब एआरटीओ दफ्तर में छापेमारी की थी। 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। सदर थाने में पूछताछ के देर रात तक उन्हें रखा था। हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद शनिवार सुबह पुलिस ने सबको क्लीनचिट दे दिया। जबकि देर शाम तक पुलिस दस्तावेजों के सहारे बड़े खुलासे की बात कह रही थी।
यहां तक कि जालजासी का केस भी दर्ज करने की बात कही जा रही थी। मगर सुबह होते हुए सब कुछ सामान्य बता दिया गया। सूत्रों की माने तो छापेमारी में जबरदस्त खेल खेला गया है। यही वजह है कि इतने सारे दस्तावेजों के मिलने के बाद भी पुलिस ने मामले में चुप्पी साध ली है। इस संबंध में एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने बताया कि जिला बॉर्डर से सटे होने के कारण चोरी की गाडिय़ों को नंबर बदलकर हेराफेरी किए जाने की शिकायत मिली थी। उसी के आधार पर जांच का निर्देश दिया गया था। मगर हिरासत में लिए गए लोगों के पास से कोई ऐसे कागजात नहीं मिले, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सके।
कइयों पर हो चुका है केस
अप्रैल 2017 में तत्कालीन डीएम सूर्यपाल गंगवार व एसपी राकेश शंकर के निर्देश पर सदर पुलिस ने छापेमारी कर 18 लोगों पर दो घंटे चली जांच के बाद धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेजा था। इससे पूर्व तत्कालीन एसपी केके चौधरी के समय भी एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की गई थी। इसमें करीब कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उस समय बड़े पैमाने पर जालसाजी की बात सामने आई थी। लेकिन इस बार दोपहर 11 बजे से लेकर देर रात चले जांच का नतीजा कुछ नहीं निकला।