सगे दो भाइयों के डूबने से हुई मौत के बाद विलाप करते परिजन ।
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उसका बाजार। हर साल रक्षा बंधन पर वे थालियां सजाती थीं और उनमें दो-दो राखियां रखती थीं। तब उनके मन में होती थी खुशियां तथा आंखों में स्नेह और प्यार। दोनों बहने सजी थालियां लेकर अपने दोनों भाइयों के पास जाती थीं और बड़े ही प्यार से उनकी कलाई पर पहले राखी बांधतीं और फिर मिठाइयां खिलाकर उन्हें आशीष देतीं। आज इन दोनों बहनों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। वे रो-रोकर बेसुध हो रही है। बार-बार उनके मुंह से बस यही निकल रहा था, ‘अब किसे बांधूंगी राखी, किसे कहूंगी भईया और कौन मुझे दीदी पुकारेगा। अब कौन मुझे चिढ़ाएगा और किससे रूठ कर मैं कहूंगी कि जा मैं तुझसे नहीं बोलती।’
यह दुख भरी दास्तांन है चित्तापुर गांव की पूजा और बिंदु की। गुरुवार को इनके दोनों भाइयों मनोज और मुकेश की कूड़ा नदी में डूबने से मौत हो गई। दोनों भाई छोटे थे। इस वजह से बहनों के लाडले थे। उनकी मौत की खबर सुनकर दोनों बहनें बार-बार बेहोश हो रही थीं और होश आते ही फिर विलाप करने लगतीं। घटना के वक्त उनके माता और पिता घर पर नहीं थे। वे गुरुवार दोपहर नेपाल में स्थित अपने खेतों में कृषि कार्य के लिए गए थे। खबर लिखे जाने तक वे घर वापस नहीं पहुंचे थे। नदी में डूबने वाला तीसरा बच्चा भी गांव का ही था। घटना की खबर जैसे ही गांव में पहुंची लोग हर काम छोड़ नंगे पैर दौड़ पड़े। बच्चों के परिजनों का विलाप देख हर किसी की आंखें नम हो गई। किसी के समझ में नहीं आ रहा था कि वह दिलासा दे भी तो कैसे और कहे भी तो क्या।
पांच संतानों में तीसरे नंबर पर था सूरज
- चित्तापुर निवासी हीरालाल साहनी भी किसान हैं। उसकी पांच संतानों में सूरज तीसरे नंबर पर था। एक बहन व एक भाई उससे बड़े और एक बहन व एक भाई छोटे। सूरज सबका दुलारा था। बेटे के शव से लिपटकर मां दहाड़े मारकर रो रही थी। बार-बार लाड़ले का नाम लेकर उसे पुकार रही थी।