सिद्धार्थनगर/चिल्हिया। शालिनी उर्फ लवली की हत्या उसके पति ने सहयोगी के साथ मिलकर की थी। पति को गिरफ्तार कर मंगलवार को पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया।
यह जानकारी सीओ शोहरतगढ़ दिलीप सिंह ने चिल्हिया थाने में मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि स्वाट व चिल्हिया पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार की देर शाम चिल्हिया थाना क्षेत्र के गौहनिया चौराहे से पति राकेश को गिरफ्तार कर लिया। बताया कि क्षेत्र के संतोरा गांव निवासी शालिनी उर्फ लवली पत्नी राकेश मिश्र की 19 अप्रैल को क्षेत्र के जगरगठिया पुल के पास धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। वहीं पति राकेश मिश्र सुरक्षित बच गया था। पति ने बताया था कि चार बदमाशों ने लूट की नीयत से प्रहार कर हत्या कर दी। मृतका के पिता बलराम मिश्र की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज कर जांच की जा रही थी। जांच में पता चला कि पति राकेश ने ही हत्या की है। सोमवार देर शाम मुखबिर से सूचना मिली कि राकेश मिश्र गौहनिया चौराहे के पास मौजूद है और वह नेपाल भागने की फिराक में है। सूचना को संज्ञान में लेते हुए एसओ रामेश्वर यादव व स्वाट प्रभारी ब्रह्मानंद गौड़ टीम के साथ मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।
किसी और महिला से था संबंध
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि राकेश मिश्र का किसी और महिला से संबंध थे। पत्नी शालिनी इसका अक्सर विरोध करती थी। बावजूद इसके राकेश दूसरी महिला को नहीं छोड़ पा रहा था। ऐसे में राकेश ने पूरी प्लानिंग कर हत्या की योजना बनाई। पति की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग हथौड़ा, खून से सने कपड़े आदि बरामद कर लिए गए है। वहीं, हत्या मेें शामिल एक अन्य आरोपी देवी प्रसाद उर्फ तड़पी राम निवासी संतोरा थाना चिल्हिया फरार है। पूछताछ करने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में चिल्हिया एसओ रामेश्वर यादव, स्वाट टीम प्रभारी ब्रह्मा गौड़, एसआई मनोज कुमार सिंह, एसआई नंदू गौतम, आरक्षी दिलीप द्विवेदी, विवेक मिश्रा, भरत यादव, कुलभास्कर, गट्टू पांडेय, दीपक गोविन्द राव, अश्वनी कुमार राय, अवनीश सिंह आदि शामिल रहे।
सर्विलांस टीम ने सुलझाई हत्या की गुत्थी
योजनाबद्ध तरीके से हुए इस हत्याकांड का पर्दाफाश करने में सर्विलांस टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कारण हत्या को लूट दर्शाने के लिए आरोपी पति द्वारा केस दूसरी ओर मोड़ दिया गया था। मोबाइल की लोकेशन और कई चक्र में हुई बात को टटोलने के बाद पुलिस नतीजे पर पहुंच सकी। अगर मोबाइल का प्रयोग कम हुआ होता तो शायद पुलिस लूट के प्रयास में हत्या की जांच में उलझी रहती।