बरामद किए गए पटाखों से संबंधित नहीं मिले कोई कागजात, मकान मालिक और तीन अज्ञात पर केस दर्ज
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इटवा पुलिस ने मकान का ताला तोड़कर बरामद किया
इटवा थाना परिसर में रखे पटाखों को नष्ट करने के लिए बुलाई गई बीडीएस टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इटवा थाने की पुलिस ने रविवार की रात एसडीएम डुमरियागंज व सीओ इटवा की अगुवाई में सहियापुर स्थित एक मकान में छापा मारा। मौके से लगभग डेढ़ डीसीएम पटाखे बरामद किए गए। पकड़े गए पटाखों की कीमत लगभग छह लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मकान मालिक के अलावा तीन अज्ञात पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
एसओ संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि मुखबिर से जानकारी मिली थी कि पुलिस चौकी शाहपुर के पास सहियापुर में आबादी में स्थित एक मकान में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे गए हैं। रविवार रात 12 बजे एसडीएम डुमरियागंज प्रवेंद्र, सीओ इटवा जयराम, तहसीलदार डॉ. संतराज सिंह, नायब तहसीलदार महबूब आलम की मौजूदगी में संदीप कसौधन के मकान पर छापा मारा गया।
पुलिस टीम ने कमरे का ताला तोड़ा तो पटाखों का जखीरा बरामद हुआ। मकान आबादी में होने के कारण कोई अनहोनी न हो, इसलिए पटाखों को दो वाहनों में लाकर थाना परिसर में रखा गया है। इसे नष्ट करने व मूल्यांकन के लिए बीडीएस टीम बुलाई गई है। मामले में मकान मालिक संदीप कसौधन सहित तीन अन्य लोगों पर केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
विस्फोट होता तो दहल जाता कस्बा
नियम के अनुसार पटाखों की खेप और फैक्टरी आबादी से दूर रहती है। ताकि विस्फोट होने पर किसी की जान न जाए। लेकिन यहां पटाखे का पूरा जखीरा रखा जा रहा था। किसी को भनक तक नहीं लग सकी। अगर कार्रवाई न होती और पटाखे जब्त न होते से दीपावली से पहले बड़ा विस्फोट और नुकसान होने से इन्कार नहीं किया जा सकता था। यह एक मकान और दुकान का मामला नहीं है। अगर जांच हो तो और भी बरामदगी हो सकती है।
पिछले साल पकड़ा गया था छह क्विंटल अवैध पटाखा
त्योहार से पहले हर साल बड़ी मात्रा में अवैध पटाखे पकड़े जाते हैं। गनीमत है कि कोई अनहोनी नहीं होती है। बीते वर्ष एसओजी की टीम ने बांसी कोतवाली क्षेत्र में छापा मारकर छह क्विंटल से अधिक के पटाखे पकड़े थे। अब दूसरी बार इटवा में इतनी बड़ी खेप पुलिस के हाथ लगी है, वह भी आबादी से सटे मकान से।
जमीन पर पटकने वाला पटाखे का हो रहा निर्माण
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डुमरियागंज और बांसी क्षेत्र के कुछ स्थानों पर पटकने वाले पटाखे बनाए जा रहे हैं। ये बांसी और डुमरियागंज से निकलकर जिले के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही भारत-नेपाल सीमा से सटे बाजारों में बिकने के लिए जा रहे हैं। इसमें बर्डपुर और ककरहवा क्षेत्र में बड़ी खेप पहुंचने की भी आशंका है। कारण यह कि यहां खरीदार अधिक हैं।
जमीन पर पटकने वाला पटाखा होता है खतरनाक
जमीन पर पटकने वाले पटाखे को सुतली बम कहा जाता है। सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाली छोटी छर्री के बीच बारूद डालकर इसके सूती बोरी या कपड़े की सुतली से बांधा जाता है। तेजी से पटकने पर यह तेज धमाका करने के साथ ही धुएं का गुबार पैदा करता है। बताते हैं कि छर्री अगर लगे तो कोई भी व्यक्ति जख्मी हो सकता है। वहीं, अगर बारूद की मात्रा अधिक करके तैयार की जाए और धमाका किया जाए तो टकराने वाली दीवार को भी क्षति पहुंचा सकता है। अगर ये पटाखे जिले के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहे हैं और बच्चों के हाथ से प्रयोग हो तो अनहोनी से इन्कार नहीं किया जा सकता है।