सिद्धार्थनगर। तीन वर्षों से निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग-233 का काम अधूरा छोड़े जाने पर लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा है। जर्जर सड़क के गड्ढों में जोखिमभरा सफर करते आजिज आ चुके लोगों ने अब कार्यदाई संस्था को कोर्ट में ले जाने का मन बना लिया है। शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने एनएच-233 के परियोजना निदेशक को हस्ताक्षरयुक्त पत्र प्रेषित कर चेतावनी दी कि अगर 15 दिनों के अंदर सड़क बनाने की कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती तो जनता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने को बाध्य होगी।
नेपाल सीमा के ककरहवा से सोनभद्र के दुद्धी तक प्रस्तावित एनएच-233 के ककरहवा-रुधौली खंड का निर्माण जनवरी 2015 में शुरू हुआ था। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जिले में इसकी आधारशिला रखी थी। कुल 65 किमी लंबी सड़क का निर्माण जून 2017 तक पूरा किया जाना था, मगर कार्यदाई संस्था की सुस्ती और लापरवाही के चलते साढ़े तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी 32 किमी सड़क का निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है। अब कार्यदाई संस्था हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस परियोजना को पूरा कराने में असमर्थता भी जता दी है।
निर्माण के लिए पूरी सड़क पहले ही खोद दी गई, जगह-जगह गिट्टियां भी बिछा दी गई, मगर उस पर कोई काम नहीं हुआ। नतीजा यह मार्ग पूरी तरह जानलेवा हो गया है। सड़क के गड्ढों में आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। धुल-मिट्टी का गुबार बीमार कर रहा है। इस पर यात्रा करने वालों में सर्वाइकल, बैक पेन की समस्या तेजी से बढ़ी है। लगातार आंदोलनों के बावजूद शासन-प्रशासन से कोई सख्ती न होने और अब काम अधूरा छोड़े जाने की जानकारी के बाद लोगों में गुस्सा है। लामबंद लोग अब कार्यदाई संस्था के खिलाफ कोर्ट में जाने की तैयारी में है।
शुक्रवार को परियोजना निदेशक को चेतावनी पत्र भेजकर मंसूबे भी जाहिर कर दिए है। पत्र में राजेश जायसवाल, विजय कुमार, ओमनारायण, सलाउद्दीन, गोलू, रवि चौधरी, कृष्णा, घनश्याम गुप्ता, प्रदीप अग्रहरि, गुरुप्रसाद अग्रहरि, गोपीनाथ, मनीष, विकास कौशल, सतीश कुमार, अकरम और संतोष आदि ने कहा कि कार्यदाई संस्था की हरकत राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 का उल्लंघन है। संस्था अपने कार्यों को पूरा करने में विफल रही है, लिहाजा उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।