सिद्धार्थनगर। माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित विद्यालयों में अब शिक्षण कार्य केवल उपस्थिति और परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रम को निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने की जवाबदेही भी तय कर दी गई है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को पूरे सिलेबस का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विभाग ने शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित निगरानी की नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत यह देखा जाएगा कि किस शिक्षक ने निर्धारित अवधि में कितना पाठ्यक्रम पूरा कराया और विद्यार्थियों तक विषयवस्तु कितनी प्रभावी ढंग से पहुंची। अधिकारियों द्वारा विद्यालयों की प्रगति का मूल्यांकन स्कोर कार्ड के माध्यम से किया जाएगा, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जहां विद्यालयों में सुविधा बढ़ा रही है। वहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने पर जोर दे रही है। जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और बेहतर कर सकें। इसमें शिक्षकों की जवाबदेही तय की जा रही है। जनपद में राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन सहित 200 से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं और करीब चार तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। अब प्रत्येक विषय के लिए पाठ्यक्रम पूर्ण करने की समय सीमा तय की गई है। शिक्षकों को मासिक एवं त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जबकि प्रधानाचार्य विद्यालय स्तर पर इसकी समीक्षा करेंगे।
अधिकारी भी ऑनलाइन एवं भौतिक निरीक्षण के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों पर नजर रखेंगे। यदि किसी विद्यालय में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पाठ्यक्रम पूरा नहीं होता है तो संबंधित शिक्षक और विद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले पूरा कोर्स पढ़ने का अवसर मिलेगा और अंतिम समय में जल्दबाजी में पढ़ाई कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से तैयार की गई इस प्रणाली में प्रत्येक विद्यालय का शैक्षणिक प्रदर्शन दर्ज किया जाएगा।
विषयवार प्रगति, विद्यार्थियों की उपस्थिति, आंतरिक मूल्यांकन और सीखने के स्तर को भी स्कोर कार्ड में शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर विद्यालयों की रैंकिंग और शिक्षकों के कार्य का आकलन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नियमित मॉनिटरिंग से कमजोर विद्यालयों की पहचान आसान होगी और समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
इस संबंध में डीआईओएस अरुण कुमार ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय- समय पर दिशा- निर्देश दिया जा रहा है।