-बाहर उद्योग लगाने वाले जिले के उद्यमियों में यहां कुछ करने की चाहत जगी, उद्योग लगेगा तो होगा विकास, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इन्वेस्टर्स समिट में शहराें के उद्यमियों ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं कीं, लेकिन उद्योग को धरातल पर उतारने के लिए जिले के मूल निवासी उद्यमी सबसे आगे हैं। उन्होंने खुद की तरक्की के लिए देश-विदेश में संघर्ष किया और खुद की नई पहचान बना ली है। अब उनकी सोच है कि वे अपनी माटी में उद्योग की नींव डालें ताकि स्थानीय क्षेत्र का विकास हो और यहां के युवाओं के लिए पलायन की मजबूरी की बजाए रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।
जिले की स्थापना के 34 साल बाद भी मध्यम एवं भारी उद्योग की बुनियाद नहीं पड़ सकी है। प्रदेश सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट की तो जिले में 222 इकाइयों के लिए एमओयू हुए हैं। 9851 करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव तैयार हुए हैं, जिसमें 7480 लोगों के रोजगार की संभावनाएं जताई गई हैं। इनमें सर्वाधिक 9000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुबंध करने वाले दक्षिण भारत के उद्यमी अब तक नहीं आए हैं, जबकि उद्योग विभाग को संभावना थी कि सबसे बड़े उद्यमी के कदम पड़ते ही लक्ष्य बताना आसान हो जाएगा। अब स्थानीय उद्यमियों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय उद्यमियों में यहां उद्योग पनपाने की अटूट अच्छा है और वे सरकारी महकमा से दो कदम आगे हैं।
जमीन की तलाश में जुटा प्रशासन
जिला प्रशासन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जमीन की तलाश में जुटा है। इटवा तहसील में पांच एकड़ जमीन है, जिसमें उद्योग शुरू कराने की कवायद की गई है, जबकि जिलाधिकारी संजीव रंजन ने निर्देश दिया है कि उद्योग के लिए 300 एकड़ जमीन की तलाश की जाए। उद्यमियों ने नेडा को पत्र लिखकर भी उद्योग के लिए जमीन की मांग की है। मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार ने बताया कि उद्योग के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। उद्योग की अड़चनों को दूर करते हुए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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आईटी पार्क बनाने में जुटे अनिवासी भारतीय उद्यमी
डुमरियागंज के वासा निवासीएवं अनिवासी भारतीय उद्यमी काजी अहमद मुख्तार ने डुमरियगंज रोड पर 25 करोड़ रुपये से आईटी पार्क बनाने का प्रयास तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण से आईटी पार्क बनाने की मंजूरी मिल गई है। पार्क में इंजीनियरों की टीम क्रियेटिव इनोवेशन करेगी। कार्य को रफ्तार पकड़ने के बाद 1000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वे हर हाल में जिले में उद्योग लगाना चाहते हैं।
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जमीन खरीदा, अब यहां बनेंगे पंखे
तेलंगान में स्ट्रक्चरल बिल्डिंग का कार्य करने वाले एवं बांसी के तारा गुजरौलिया निवासी आरएस पांडेय ने 2.5 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए जमीन खरीदी है। इसमें इलेक्टि्रक एवं इलेक्ट्रानिक पंखे के पार्ट्स बनाए जाएंगे, जबकि उन्होंने शिवम बिल्डिंग के नाम से बड़े प्रोजेक्ट की नीव डालने की कोशिश की है, जिसके लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में मानव संसाधन पर्याप्त है। यहां हम विकास करेंगे और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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सीबी गैस और काऊ ब्रिडिंग यूनिट
लखनऊ में ग्रुप हाउसिंग का कार्य करने वाले शोहरतगढ़ के राजेश बोरा ने बताया कि उन्होंने छह करोड़ रुपये से काऊ ब्रिडिंग कार्य शुरू करने के लिए बैंक में लोन का आवेदन किया है। इस प्रोजेक्ट में शाहीवाल, गिर व थापड़ का सीमन बनाया जाएगा ताकि देसी गोवंश की नस्ल में सुधार हो। इसके साथ ही कृषि के अवशेष जैसे पुआल, पराली, गन्ने की पत्तियों से सीबीजी गैस बनाने का प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए 20 एकड़ जमीन की तलाश कर रहे हैं, यह 30 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। उन्होंने बताया कि बैंक से आवेदन स्वीकृत होते ही काऊ ब्रिडिंग यूनिट का काम शुरू हो जाएगा।
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कालानमक से बनाएंगे बिस्कुट
बर्डपुर नंबर 10 के निवासी डॉ. अजय रावत ने 9000 चूजे की क्षमता वाली पैरेंट फार्मिंग शुरू की है। उन्होंने जिले में सबसे पहले पैंरेंट फार्मिंग शुरू की और अब दो कराेड़ रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट हो गया है। इसमें करीब दो हजार लोगाें को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। अब उन्होंने कालानमक चावल से बिस्कुट बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया है। स्ट्रक्चर तैयार हो गया है, जबकि मशीनों को ऑर्डर भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को शुरू होने के बाद बिस्कुट से भी कालानमक की खुशबू आएगी और किसानों को भी अच्छा लाभ मिलेगा।