संवाद न्यूज एजेंसी
ढेबरूआ। विकास खंड बढ़नी में जल जीवन मिशन की गति धीमी होने से लगभग 80 प्रतिशत गांवों में लोगों का टोंटी से जल मिलने का सपना अधूरा रह गया है। कई गांवों में वॉटर टैंक का निर्माण अधूरा है। कुछ गांवों में पाइप लाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन अभी तक घरों तक नल का कनेक्शन नहीं पहुंचा है।
इमलिया जनूबी, भावपुर उर्फ गुलरी, गनेशपुर, अर्री और पड़रिया जैसे कुछ गांवों में पानी की आपूर्ति सुचारु रूप से चल रही है, लेकिन अधिकतर गांवों में अभी भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी में पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती है, जिससे गरीब परिवारों को स्वच्छ पेयजल खरीदना मुश्किल हो जाता है।
गोविंद द्विवेदी, सुबोध पाठक, राम पाठक, अमित मिश्रा, आयुष शुक्ल और अन्य कई स्थानीय निवासियों ने जल जीवन मिशन की धीमी रफ्तार से हो रहे कार्यों पर चिंता जाहिर की है। जल जीवन मिशन के एक्सईएन संजय जायसवाल ने काम में देरी के लिए फंडिंग की समस्याओं को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने बताया कि जिले में कार्य कर रही तीन एजेंसियों को लगभग 50 से 55 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, और भारत सरकार ने योजना को 2028 तक बढ़ा दिया है। हालांकि, राज्य स्तर से अभी तक एक्टेंशन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
संजय जायसवाल ने यह भी बताया कि उनका मुख्य ध्यान टैंकों के निर्माण जैसे समय लेने वाले कार्यों को पूरा करने पर है। फंडिंग उपलब्ध होने पर छोटे-मोटे कार्यों को भी पूरा किया जाएगा। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वह फंडिंग की समस्याओं को जल्द से जल्द हल करे और सभी गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए।