बढ़नी। भारत-नेपाल बॉर्डर पर प्रस्तावित भव्य प्रवेश द्वार का काम अधूरा है। लंबे समय से काम ठप रहने से स्थानीय लोगों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि काम न पूरा होने से आवाजाही तो मुश्किल है ही। वहीं, हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
बढ़नी बॉर्डर जो भारत-नेपाल के बीच व्यापार और आवागमन का अहम केंद्र है। यहां एक आकर्षक और आधुनिक गेट निर्माण की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना का मकसद न सिर्फ सीमा क्षेत्र का सुंदरीकरण करना था बल्कि यहां आने-जाने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधा और क्षेत्र की पहचान को मजबूत करना भी था।
शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। निर्माण स्थल पर काम की रफ्तार बेहद धीमी है और कई बार तो पूरी तरह से बंद भी दिखती है। आधा-अधूरा ढांचा इस बात की गवाही दे रहा है कि परियोजना लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है।
विनोद कुमार, अजीत श्रीवास्तव, मोहन सहित अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि गेट बनने से बढ़नी की एक अलग पहचान बनती, लेकिन अब यह अधूरा ढांचा सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की याद दिला रहा है।
सीमावर्ती व्यापारियों का भी कहना है कि इस गेट के बनने से आवाजाही व्यवस्थित होती और व्यापार को बढ़ावा मिलता, लेकिन देरी से इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। परियोजना में देरी के पीछे प्रशासनिक सुस्ती, फंड की उपलब्धता में कमी और ठेकेदारों की लापरवाही जैसे कारण सामने आ रहे हैं। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है कि काम कब तक पूरा होगा।
इस अधूरे निर्माण का असर सिर्फ सुंदरीकरण तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव स्थानीय व्यापार और आम लोगों की सुविधा पर भी पड़ रहा है। बॉर्डर पर अव्यवस्था बनी रहती है और यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
अवर अभियंता पीडब्ल्यूडी आरके शर्मा ने बताया कि बढ़नी बॉर्डर पर गेट निर्माण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। जून के अंतिम सप्ताह तक इसे शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा।