सिद्धार्थनगर। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच की नियुक्ति नहीं होने से खिलाड़ी ट्रॉफी से चूक रहे हैं। जिले में 1995 में स्टेडियम बन कर तैयार हुआ था। लेकिन अभी तक अधिकतर खेल में कोच की नियुक्ति नहीं हो पाई हैं। इससे जिले में खेल का बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है।
जिले में 1993 में स्टेडियम बनना शुरू हुआ था। जबकि 1995 में स्टेडियम बनकर विभाग को हैंड ओवर हो गया। लेकिन तब से अभी तक क्रीड़ा अधिकारी सहित कुश्ती, तैराकी, वाॅलीबाल, एथलेटिक्स, फुटबाल व हैंडबाल के ही कोच की नियुक्ति हो पाई हैं। जबकि 2007 में बैडमिंटन का कोर्ट बना। लेकिन कोच की नियुक्ति के अभाव में बैडमिंटन कोर्ट टूट गया। प्रति वर्ष फरवरी माह में कोच का डिमांड किया जाता हैं। लेकिन किसी कारण बस जिले में कोच की नियुक्ति नहीं हो पाती है।
क्रीड़ा अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री ने 2023 में कबड्डी, खो खो फुटबाल व हैंडबॉल के कोच का डिमांड किए थे। इसमें से फुटबॉल व हैंडबाल की कोच की नियुक्ति की गई थी। लेकिन कुछ दिन बाद ही हैंडबाल की कोच वापस चली गई। जबकि फुटबॉल की कोच मात्र नौ माह में ही प्रशिक्षण देकर चार खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया। जिले में एथलेटिक्स के भी खिलाड़ी बड़े पैमाने पर हैं। लेकिन प्रशिक्षक के अभाव में खिलाड़ियों को गोल्ड मेडल से चूक रहे हैं।
इन खेलों में कोच की है जरूरत
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में वॉलीबाल, हैंडबाल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो खो, बास्केटबाल, ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, कुश्ती आदि खेल के कोच की नियुक्ति नहीं हुई हैं। जबकि इन खेलों के खिलाड़ी स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं। स्टेडियम में प्रति वर्ष प्रतियोगिता होती रहती हैं। लेकिन कोच की कमी के कारण खिलाड़ी मेडल लाने से चूक जाते हैं।
चार कोच की नियुक्ति के लिए प्रशासन को भेजा गया हैं पत्र
क्रीड़ा अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री फरवरी माह में वालीबाल, फुटबॉल, कबड्डी, खो खो व ताइक्वांडो के कोच का डिमांड किए हैं। कोच की नियुक्ति अप्रैल माह में की जाती हैं। प्रशिक्षक के आने से इन खेलों को बढ़ावा मिलेगा। जल्द ही सभी खेल के कोच स्टेडियम में नियुक्त कर लिए जाएंगे।
-आशुतोष अग्निहोत्री, क्रीड़ा अधिकारी