सिद्धार्थनगर। अधिग्रहित भूमि के मुआवजे का चेक देने के बदले 10 प्रतिशत की रिश्वत मांग रहे भूमि अध्याप्ति विभाग के अहलमद (लिपिक) को विजिलेंस की टीम ने शनिवार को रंगेहाथ दबोच लिया। कलेक्ट्रेट गेट के पास चाय की दुकान से उसे गिरफ्तार कर टीम साथ ले गई। पूछताछ के बाद उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
मोहाना थाना क्षेत्र के दुल्हा सुमाली गांव निवासी शोएब अहमद की भूमि एसएसबी के बीओपी निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई है। उसे अब तक इसका मुआवजा नहीं मिला है। उसके भाई व मां के हिस्से की भूमि का मुआवजा भी लंबित है, जबकि आस-पास के अन्य भू-स्वामियों को काफी पहले ही मुआवजा राशि दी जा चुकी है।
मुआवजे के लिए उसने कई बाद अफसरों के चक्कर लगाए। हर स्तर पर अहलमद चिंतामणि से संपर्क करने को कहा जाता रहा। शोएब ने जब अहलमद से संपर्क किया तो कुल 1205960 रुपये (दोनों भाई व मां) के मुआवजा के बदले 10 प्रतिशत की डिमांड की गई। काफी मिन्नतों के बाद भी बात नहीं बनी। अंत में यह तय हुआ कि 10 हजार रुपये पेशगी मिलने पर बिल ट्रेजरी में पेश किया जाएगा। चेक क्लीयरेंस होने के बाद शेष भुगतान देना होगा। शोएब ने विजिलेंस गोरखपुर के एसपी कुश सौरभ को मामले से अवगत कराया।
एसपी ने अपने स्तर से मामले की पड़ताल के बाद टीम गठित कर शनिवार को जिले में भेजा। टीम ने केमिकल लगे 2-2 हजार के पांच नोट शोएब को सौंपे और उसे अहलमद को देने को कहा। कलेक्ट्रेट के बाहर बुलाकर चाय की दुकान पर शोएब ने जैसे ही यह रुपये अहलमद चिंतामणि को थमाए, पहले से निगाह जमाई टीम ने उसे पकड़ लिया। पानी से धुलते ही हाथ लाल हो गया। टीम उसे लेकर सदर थाने पहुंची और पूछताछ की। यहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर अहलमद को जेल भेज दिया गया।