ताइक्वांडो का अभ्यास करतीं बेटियां (फाइल फोटो)।
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सिद्धार्थनगर। निर्भया कांड के बाद बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उछला। उन्हें आत्मरक्षा में पारंगत करने की योजनाएं बनीं। निर्देश था कि स्कूल-कॉलेजों से इसे लागू किया जाए, जिससे बेटियां शोहदों को मुंहतोड़ जवाब दे सकें। शुरुआती तेजी के बाद अभियान सुस्त हो चला। चुनिंदा स्कूलों को छोड़ दें तो अन्य कहीं भी न तो कोई कैंप आयोजित हो रहा है और न ही ऐसी कोई अन्य गतिविधि। सब कुछ कागजों में सिमट गया। सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस के कंधों पर है। पुलिस तक भी सूचनाएं तभी पहुंचती हैं, जब घटना हो चुकी होती है।
जिले में 740 पूर्व माध्यमिक और 13 कस्तूरबा और 140 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। तेतरी बाजार, बांसी और डुमरियागंज में तीन जीजीआईसी भी है। इसमें जीजीआईसी तेतरी और कस्तूरबा विद्यालयों को छोड़कर कहीं भी छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण के सरकारी इंतजाम नहीं हुए हैं। कुछ प्राइवेट स्कूल जरूर निजी स्तर से कैंप का संचालन करा रहे हैं, मगर इसमें भी उन्हीं की रुचि है जो महंगी फीस देने में सक्षम हैं। बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सरकारी स्तर पर इंतजाम न होने से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां चाहकर भी खुद को सबल नहीं बना पा रहीं।
डरी-सहमी हाल में वह राह चलने को मजबूर हैं, जिनका फायदा मनचले उठा रहे हैं। पुलिस आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2016 में दुष्कर्म के 20 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2017 में यह संख्या 25 थी। लड़की भगाने के 142 मामले इस वर्ष सामने आए। छेड़ख़ानी की घटनाओं में भी पूर्व की अपेक्षा वृद्धि हुई है। हालांकि इसके बावजूद 1090 हेल्पलाइन पर आने वाली सूचनाओं की संख्या बेहद कम है। पुलिस अपने स्तर से सुरक्षा के दावे करने में पीछे नहीं है।
प्रभारी एसपी अरविंद मिश्र का कहना है कि महिला सुरक्षा पर गंभीरता से काम हो रहा है। एंटी रोमियो स्क्वॉड के साथ यूपी-100 व कोबरा टीम लगातार भ्रमण कर रही है। कोई भी घटना संज्ञान में आने के बाद त्वरित कार्रवाई होती है। स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्राओं को डॉयल-100 व 1090 के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। अभिभावक व आम लोगों को भी इसके प्रति सतर्क होना होगा। किसी भी घटना में तत्काल पुलिस को सूचना देने में न हिचकें।