सिद्धार्थनगर। शासन-सत्ता भले ही बदल गई हो, मगर परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। बदहाली के शिकार स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था ध्वस्त है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों को पीएम, सीएम, डीएम का नाम तक नहीं पता। कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां आज भी मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव का ही नाम अंकित है। गिनती, पहाड़ा जैसी बेसिक जानकारियों से बच्चे महरूम हैं। कहीं पेयजल का इंतजाम नहीं है तो कहीं शौचालय खराब पड़ा है। साफ-सफाई नदारद है। शिक्षकों के आने-जाने का समय भी तय नहीं है। गुरुवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अमर उजाला टीम की पड़ताल के दौरान परिषदीय स्कूलों की कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई।
मनमाने ढंग से चल रही इस व्यवस्था का असर है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र की हो रही है। रजिस्टर पर लंबे-चौड़े आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि स्कूल में उपस्थिति गिनती के बच्चों की हो रही है। लापरवाही का यह आलम तब है, जब प्रदेश की बेसिक शिक्षा मंत्री खुद स्कूलों में जाकर निरीक्षण कर रही हैं। लगातार खामियां उजागर होने के बावजूद विभागीय अफसरों की सक्रियता पर कोई असर नहीं है। कागजी घोड़े दौड़ाने में मशगूल अफसरों की कारस्तानी से जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था चौपट होती जा रही है। मिश्रौलिया। बांसी तहसील क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय तीवर में 135 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में तैनात शिक्षक रेनू पांडेय और रमा त्रिपाठी गुरुवार को उपस्थित रहीं। यहां साढ़े आठ बजे प्रार्थना शुरू होने जा रही थी। देरी के सवाल पर इंचार्ज प्रधानाचार्य रेनू पांडेय ने बताया कि अभी सफाई हो रही थी। विद्यालय में शौचालय का बुरा हाल था। हैंडपंप के पास गंदगी लगी थी। कक्षा चार की छात्रा संध्या, सरिता, कक्षा तीन के आशीष को न तो पीएम का नाम पता था और न ही डीएम का।
प्रयाग रावत जूनियर विद्यालय चेतिया में सुबह 8.50 बजे प्रधानाध्यापिका शकुंतला देवी और सहायक अध्यापिका प्रगति मिश्रा मौजूद थी। अनुदेशक नागेंद्र सिंह और अमितेष श्रीवास्तव बोर्ड परीक्षा ड्यूटी में गए थे। यहां अभी हाजिरी लग रही थी। विद्यालय में कुल 300 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि उपस्थिति महज 59 की थी। रसोई घर बंद मिला। नौ बजे तक रसोइयां का पता नहीं था। कक्षा छह के छात्र बिना शिक्षक के ही बैठे मिले। विद्यालय में शौचालय पर ताला लगा था। जिन कमरों में पढ़ाई हो रही थी, वहां गंदगी पसरी हुई थी। छात्रा दामिनी त्रिपाठी को शिक्षा मंत्री का नाम नहीं पता था। सातवीं की छात्रा अंकिता बीएसए के नाम से अनजान थी। छठवीं के अंकित भी पीएम व डीएम का नाम नहीं बता सके। मिश्रौलिया। प्राथमिक विद्यालय असिधवा द्वितीय पर 130 बच्चे पंजीकृत हैं। उपस्थिति सिर्फ 37 की थी। तीनों शिक्षक उपस्थित थे। एमडीएम भी तैयार हो रहा था, मगर शौचालय गंदगी से पटा था। कक्षा 3 की छात्रा सोनाली को पीएम, डीएम और बीएसए का नाम नहीं पता था। प्राथमिक विद्यालय बड़हरा में पंजीकृत 103 बच्चों में 44 उपस्थित रहे।
शौचालय गंदगी से पटा था तो विद्यालय के मुख्य गेट पर नाले का पानी लगा हुआ था। प्राथमिक विद्यालय सुभौली में पंजीकृत 54 में से सिर्फ आठ बच्चे ही मौजूद थे। एमडीएम न बनने के बारे में सहायक अध्यापक इम्तियाज अहमद ने बताया कि राशन नहीं मिला है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुभौली में तैनात शिक्षक मोबाइल पर बतियाने में मशगूल थीं। अनुचर भी बगल की कुर्सी पर आराम फरमा रहा था। विद्यालय पर 27 छात्र पंजीकृत हैं पर उपस्थित एक भी नहीं थे। शिक्षिका बीनू शर्मा का कहना था कि यहां के बच्चे मकतब में पढ़ते हैं, इस कारण विद्यालय देर से आते है। इस विद्यालय पर दोपहर का भोजन नहीं बनता।
मिश्रौलिया। प्राथमिक विद्यालय ओदनाताल में 88 बच्चों के सापेक्ष 50 उपस्थित रहे। सहायक अध्यापिका के पति भी बच्चों के लिए बने दोपहर के भोजन का लुत्फ उठाने में मशगूल थे। भोजन मीनू के अनुसार न बनने पर शिक्षिका ने बताया कि कोटेदार ने केवल चावल ही दिया है, इसलिए रोटी नहीं बनती। यहां सिर्फ तीन दिनों से ही एमडीएम बनना शुरू हुआ है। प्राथमिक विद्यालय महुवारी में सहायक अध्यापक राखी तोमर और शिक्षा मित्र नदीम अहमद मौजूद रहे। शौचालय में गंदगी का ढेर था। हैंडपंप और कमरे के पास भी गंदगी फैली थी। विद्यालय पर सहायक अध्यापिका पढ़ा रही थी, लेकिन एमडीएम नहीं बन रहा था। प्राथमिक विद्यालय उड़लिया में 188 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ 71 ही मौजूद रहे। इस विद्यालय पर भी दोपहर का खाना नहीं बना था। इसकी वजह प्रधान द्वारा राशन न देना बताया गया। बर्डपुर। सूबे में नई सरकार के शपथ ग्रहण को एक माह बीत चुका है, मगर चकईजोत ग्राम पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मिश्रौलिया में आज भी मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव का ही नाम अंकित है। स्कूल की दीवारों पर शिक्षा मंत्री के रूप में अहमद हसन का नाम दर्ज है।
जुलाई में ही ट्रांसफर करा कर जा चुके प्रधानाध्यापक लालबहादुर सिंह यादव का नाम बोर्ड पर अब तक चला आ रहा है। यहां शिक्षा के प्रति जिम्मेदारों की सचेतता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। गुरुवार को दोपहर करीब 12 बच्चे विद्यालय में नामांकित 104 बच्चों में सिर्फ 31 मौजूद मिले, जबकि रजिस्टर में 23 की हाजिरी लगी थी। एमडीएम रजिस्टर पर 29 बच्चों का उल्लेख था। प्रभारी प्रधानाध्यापक सुषमा जायसवाल का दावा था कि एमडीएम में रोटी-सब्जी बना था, जबकि बच्चे चावल-सब्जी खाने की बात बताते रहे। विद्यालय की अव्यवस्था पर खंड शिक्षा अधिकारी विजय कुमार गुप्ता का कहना था कि यह बड़ी लापरवाही है। सह समन्वयक के माध्यम से शुक्रवार को जांच कराई जाएगी। संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई होगी।