भनवापुर। कहते हैं कि मन में सच्ची लगन व कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो इंसान के लिए कुछ असंभव नहीं है। ऐसा ही कुछ भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के बामदेई गांव निवासी उर्मिला ने कर दिखाया है। बचपन मुफलिसी में बीते दिनों के दौरान दृढ़ इच्छा शक्ति व संकल्प के बल पर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज क्षेत्र में शिक्षण संस्था के माध्यम से शिक्षा की अलख जगा रही हैं। सिद्धार्थनगर न
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के दक्षिण पश्चिम राप्ती नदी के तट पर स्थित बामदेई गांव के ज्वाला प्रसाद मिश्र के तीन बेटियों व एक बेटे में सबसे छोटी बेटी उर्मिला मिश्रा का मन बचपन से ही कुछ अलग करने की चाहत परिवार की स्थिति दयनीय होने के बाद भी कम नहीं हुई। प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद पिता ज्वाला प्रसाद को बेटी की शादी की चिंता सताने लगी। पिता को परेशान देख उर्मिला ने कहा दो बहनों की शादी आप पहले कर चुके हैं। क्या मैं दूसरे बेटे के रूप में आपके साथ रहकर आपके हर कार्यों में सहयोग करते हुए परिवार के पालन पोषण में भागीदार बनूंगी। उसके बाद मास्टर डिग्री हासिल की। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण घर से करीब सोलह किलोमीटर दूर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया कन्या इंटर कॉलेज सिरसिया में शिक्षण कार्य शुरू किया। साइकिल से 32 किलोमीटर आना जाना एक महिला के लिए अपने आप में मिसाल था। बतौर उर्मिला धीरे-धीरे बच्चों को ट्यूशन के रूप में शिक्षा देना और क्षेत्र के बच्चे व उनके अभिभावकों के प्रेरणा व उनके सहयोग से बाल ब्रह्मचारिणी उर्मिला देवी शिक्षा निकेतन के नाम से शिक्षण संस्था का संचालन कर क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। संवाद