खेसरहा। क्षेत्र के किसान इन दिनों फसलों को बचाने के लिए गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। छुट्टा पशुओं और जंगली जानवरों, खासकर नीलगायों के आतंक ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। दिन भर खेतों में कड़ी मशक्कत करने के बाद अब किसानों को रात में भी जागकर फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है, जो उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।
बताया जा रहा है कि एक ओर जहां किसान महंगाई, खाद और बीज की किल्लत से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कभी प्राकृतिक आपदाएं तो कभी जंगली जानवर उनकी उपज को पूरी तरह बर्बाद कर रहे हैं। खेतों में बोई गई गेहूं ,आलू, गोभी, मटर , टमाटर, लौकी सहित अन्य सब्जी फसलें छुट्टा पशुओं, नीलगाय, बनैला सुअर और साही जैसे जानवरों द्वारा रौंद दी जा रही है। सबसे अधिक नुकसान पेड़ारी बुजुर्ग, लमुईताल, पिपरा, पिढ़िया, सुरहीताल, सिवानों में बोई गई फसलों को हो रहा है। संवाद
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