संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कुशीनगर में हुए हादसे के शिकार जिले के चार लोग जो परिवार ही नहीं, बल्कि हर किसी के चेहते थे, सभी को रुला गए। नगर के मधुकरपुर से एक-एक करके शिक्षक और राजस्व निरीक्षक की अर्थी उठी तो वहीं नगर के रेलवे स्टेशन रोड से ग्राम विकास अधिकारी और बांसी के फूलपुर व्यापारी की। हर जगह करीबियों और जानने वालों का हुजूम रहा।
इसमें हर चेहरे पर गम दिख रहा था और आंखें नम थीं। शिक्षक और राजस्व निरीक्षक का जोगिया कोतवाली के ककरही घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। वहीं, ग्राम विकास अधिकारी नगर के जमुआर और व्यापारी अयोध्या में अंतिम संस्कार हुआ। वहीं, परिवार के लोगों का रो- रोकर बुरा हाल है।
मधुकरपुर में मातम, हर कोई घटना से आहत : इस हादसे ने सबसे बड़ा आघात मधुकरपुर गांव को दिया, जो शायद कोई भूल न पाए। इस हादसे ने न सिर्फ नेक दिलों के लोगों की जान ले ली, बल्कि दो लोग घायल भी हुए हैं।
हम उम्र रामकरन गुप्ता और कैलाश मणि एक गांव के थे ही। साथ ही इनकी जोड़ी बेमिसाल मानी जाती है। लोगों का कहना है कि पढ़ाई के साथ सरकारी सेवा में आने तक लोग एक- दूसरे के अच्छे दोस्त रहे।
गांव में धार्मिक आयोजन हो या फिर मांगलिक कार्यक्रम, निकलते एक साथ थे। बाबा धाम दर्शन के लिए भी वे एक साथ गए। एक साथ दोनों लोगों की मौत भी हुई। लाश एक साथ गांव में पहुंची। घटना के बाद से ही गांव में मातम पसरा था। दोनों के घर एक से दूसरे छोर पर थे। सोमवार को एक- एक करके दोनों लोगों की थोड़े अंतराल पर अर्थी उठी। तो लोग आंसू नहीं रोक पाए। कारण दोनों जिस यात्रा पर निकले थे, वहां से कभी वापस नहीं आना था।
परिवार के लोगों की रो- रोते आंखें सूख चुकी थीं। निकल रही थी तो बस सिसकियां और आवाज जो अन्य लोगों को हिला दे रही थी। कारण सभी के बच्चे अभी अपने पैर पर नहीं थे। अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं। जोगिया के ककरही घाट बूढ़ी राप्ती के तट पर दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार हुआ। हर कोई यह चर्चा कर रहा था कि बहुत अच्छे थे।
यह जोड़ी बेमिसाल थी। वहीं, परिवार के लोग इस आघात से इतना टूट गए थे कि कुछ बोल पाने और बता पाने में असमर्थ थे।
हमेशा हंसकर बोलने वाले सुजीत अंतिम यात्रा में लोगों को रुला गए : नगर के रेलवे स्टेशन रोड निवासी सुजीत जायसवाल (48) पुत्र राम नरेश जायसवाल खुनियांव ब्लाॅक में ग्राम विकास अधिकारी पद पर कार्यरत थे। घटना की जानकारी के बाद मोहल्ले के लोग और रिश्तेदारों का आना- जाना लगा रहा।
सोमवार को नगर के जमुआर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए उनकी अंतिम यात्रा निकली तो परिवार के साथ हर कोई रो रहा था। कारण हमेशा हंसकर बोलने और हंसाने वाले सुजीत खामोश हो चुके थे। साथ ही उस यात्रा पर निकल चुके थे जहां से उन्हें कभी लौटना नहीं था।
लोगों को कष्ट खाए जा रहा था। कारण हमेशा हंसने और हंसने वाला उनसे हमेशा के लिए अलविदा हो रहा था। परिवार के साथ बच्चाें का रो- रोकर बुरा हाल था। बूढ़े पिता की आवाज तक नहीं निकल रही थी। क्योंकि, उनका होनहार बेटा उन्हें छोड़ चुका था। वहीं, पत्नी, बच्चों का रो- रोकर बुरा हाल था।
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