राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और नेपाल के आपसी रिश्तों में भले ही खटास उत्पन्न हो गई हो, मगर सीमावर्ती क्षेत्र में इसका कोई असर नहीं दिख रहा। गौतम बुद्ध की सरजमीं पर दोनों के सीमावर्ती लोग रोटी-बेटी के संबंधों को पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं।
दोनों मुल्कों के सीमायी इलाके के जरूरतमंद आराम से एक-दूसरे के पास आ-जा रहे हैं। काठमांडू और नई दिल्ली के बीच तनातनी से लोग चिंतित हैं, मगर अपने प्रगाढ़ संबंधों के कारण बेखबर भी। बॉर्डर क्षेत्र के लोगों का साफ कहना है कि भारत और नेपाल केवल पड़ोसी नहीं, परिवार हैं। भारत के बिना न नेपाल बढ़ सकता है और न ही नेपाल को छोड़कर भारत।
भारत के अलीगढ़वा (कपिलवस्तु थाना) और नेपाल के चाकरचौड़ा बाजार के बीच सिर्फ नो मेंस लैंड का फासला है। यानी कुल 25 से 30 फीट। दाल-रोटी भी खरीदनी हो तो लोग चाकरचौड़ा से अलीगढ़वा आते हैं। ठीक ऐसे ही सौंदर्य प्रसाधन, कपड़ा की जरूरत हो तो अलीगढ़वा से चाकरचौड़ा बाजार।
बॉर्डर से ठीक सटे दुकान खोले अलीगढ़वा के सतीश का कहना है कि अंतिम छोर पर स्थित यह बाजार तो नेपाल पर ही टिका हुआ है। वहां के लोग खरीदारी के लिए न आएं तो दुकानदारी ठप हो जाएगी। चाय की चुस्की ले रहे वीरेंद्र ने कहा कि भारत और नेपाल का अंतर हमें नहीं पता।
बचपन से ही हम इस पार से जुड़े हुए हैं।
दोस्त, यार, बाजार सब कुछ यहीं हैं। नेताओं का क्या है, उन्हें तो बस अपने हित साधने हैं। देश का और जनता का हित उन्हें समझ नहीं आ रहा। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया चाकरचौड़ा के कपड़ा तथा जनरल स्टोर व्यापारी भान का था। उन्होंने कहा कि तीन माह से आंदोलन के चलते रास्ता अवरुद्ध है। माल नहीं ला पा रहे। भारत के सहारे कारोबार टिका है। कुछ लोग निजी हित के लिए दोनों देशों के संबंधों को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, मगर कामयाबी नहीं मिलेगी। भारत ही हमारा सच्चा हम दर्द है। यहीं पान की दुकान खोले महेंद्र शर्मा ने भी दोनों देशों के बीच तनाव पर चिंता जताई। कहा कि कोई कुछ कर ले, हमारे संबंध नहीं टूटने वाले।