संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी के इस दौर में बसों का सफर लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। दोपहर में सड़क पर दौड़ती बसें अंदर से भट्ठी जैसी महसूस हो रही हैं। सरकारी बसों में पंखों की व्यवस्था नहीं है, खिड़कियों से आने वाली हवा भी राहत देने के बजाय गर्म थपेड़ों जैसी लग रही है।
ऐसे में यात्रियों को पसीना, घुटन और बेचैनी के बीच सफर पूरा करना पड़ रहा है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के सामने डिहाइड्रेशन और तबीयत बिगड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
सुबह और शाम के मुकाबले दोपहर में हालात सबसे ज्यादा खराब हो रहे हैं। रोज बस से ड्यूटी करने वाले वाली चांदनी त्रिपाठी बताती हैं कि बस स्टैंड से निकलते ही बसों के भीतर उमस बढ़ने लगती है। सीटें गर्म हो जाती हैं और भीड़ बढ़ने पर सांस लेना तक मुश्किल महसूस होने लगता है।
यात्री मंजीत कहते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। बस्ती-लखनऊ, गोरखपुर और आसपास के रूटों पर चलने वाली सामान्य रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बसों में सिर्फ खुली खिड़कियां ही हवा का सहारा हैं।
र