कपिलवस्तु में स्तुप पूजन करतीं पर्यटन मंत्री और सांसद।
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सिद्धार्थनगर। विश्व को शांति, अहिंसा व करुणा का संदेश देने वाले तथागत की धरती कपिलवस्तु में उनके अस्थि कलश व अन्य महत्वपूर्ण अवशेष वापस लाने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। इसके लिए जल्द ही प्रधानमंत्री और केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात कर प्रस्ताव रखा जाएगा। बौद्ध सर्किट के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार प्रयत्नशील हैं। ये बातें प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहीं। ये अवशेष यहीं खुदाई में मिले थे। तब संसाधनों के अभाव में इन्हें दूसरे संग्रहालयों में भिजवा दिया गया था।
वे शनिवार को कपिलवस्तु में ‘स्वदेश दर्शन योजना’ समेत अन्य परियोजनाओं के कार्यों का निरीक्षण करने आई थीं। जिले में पहली बार आईं पर्यटन मंत्री ने सबसे पहले मुख्य स्तूप पर पहुंचकर परिक्रमा की। उन्होंने धम्मानंद, भंते रतन सागर, बुद्धा रतन, प्रियदर्शी से बातचीत कर कपिलवस्तु के इतिहास के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कपिलवस्तु संग्रहालय का भी निरीक्षण किया। इसके बाद सांसद जगदंबिका पाल, इटवा के विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी की मौजूदगी में पत्रकारों से बातचीत में पर्यटन मंत्री ने कहा कि कोलकाता व दिल्ली के संग्रहालयों में रखे बुद्ध के अस्थि कलश व अन्य पुरातात्विक अवशेष यहां वापस लाने की पहल की जाएगी।
कपिलवस्तु में बौद्ध मंदिर निर्माण के लिए 15 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होने के साथ ही बुद्धा थीम पार्क के लिए राज्यांश से मिलने वाली शेष धनराशि की भी स्वीकृति हो चुकी है। केंद्र सरकार की बौद्ध सर्किट योजना में सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती के साथ ही कपिलवस्तु को भी शामिल किया गया है। मंत्री के निरीक्षण के दौरान प्रभारी डीएम प्रमोद शंकर शुक्ला, एसडीएम राजेश सिंह, सीओ शिव सिंह, लखनऊ से आए संयुक्त निदेशक पीके सिंह, उप निदेशक अनूप कुमार श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अरविंद कुमार राय, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी मो. मकबूल, भाजपा नेता राजेंद्र पांडेय व कौशलेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।