प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया का नारा जिले में फुस्स साबित हो रहा है। गांव-गिरांव तो दूर जिले के शहरी क्षेत्रों में बीएसएनएल नेटवर्क का बुरा हाल है।
अफसर कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं और नेटवर्क की तलाश में उपभोक्ता हांफ रहे हैं। तीन 3-जी टॉवर के बावजूद मुख्यालय पर 2-जी की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। बार्डर क्षेत्रों में महीनों पहले लगे बीटीएस अब तक चालू नहीं हो पाए हैं।
नतीजा लोगों के लिए निजी सेवाओं का सहारा मजबूरी बनती जा रही है।दूरसंचार सेवा के लिए जिले के तीन सब डिविजन में विभाग ने 71 मोबाइल टावर खड़े कर रखे हैं।
14 वाई मैक्स और आठ डब्लूडब्लूएल बीटीएस लगाए गए हैं। थ्री-जी सेवा के लिए सिद्धार्थनगर मुख्यालय, तेतरी बाजार और पुराना नौगढ़ में तीन टॉवर लगे हैं।
इनके बावजूद बीएसएनएल नेटवर्क को ढूंढना पड़ रहा है। थ्री वाले क्षेत्रों में टू-जी नेटवर्क भी काम नहीं कर रहा। बजहां, बगहीं, कपिलवस्तु जैसे क्षेत्रों में बीटीएस लगे महीनों बीत चुके हैं, मगर यहां इंटरनेट तो दूर मोबाइल फोन भी काम नहीं करता।
अंतर्राष्ट्रीय बार्डर और बड़ा पर्यटन क्षेत्र होने के कारण यहां नेटवर्क मजबूत होना सुरक्षा कारणों से भी जरूरी है, जबकि स्थिति ठीक उलट है। नेटवर्क न होने का लाभ आपराधिक और शरारती तत्व उठा रहे हैं।
सीमा के आस-पास से तस्करी की बढ़ती घटनाएं इसी का परिणाम बताई जा रही हैं। जिम्मेदार लोग सिर्फ नेताओं और अफसरों को खुश करने में लगे हुए हैं।
इस संबंध में दूरसंचार विभ्ााग के एसडीआे दुर्गेश सिंह ने बताया कि तकनीकी कारणों से कुछ बीटीएस शुरू नहीं हो पाए हैं। कइयों पर काम चल रहा है।
बार्डर क्षेत्रों में भी नेटवर्क मजबूत कराने के लिए नए बीटीएस लगाए जा रहे हैं। सेवा में सुधार का प्रयास लगातार जारी है। इसका असर भी जल्द ही दिखेगा।