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Siddharthnagar News: ब्लड बैंक में पहुंचा था 5000 रुपये में खून बेचने, पूछताछ में पकड़ा गया

Sun, 08 Oct 2023 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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फोटो- है
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ब्लड बैंक कर्मियों ने निजी अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए खून बेचने आए डोनर और अस्पताल के कर्मी को पकड़ा
पूछताछ में हुआ खुलासा, पांच हजार पर देने आया था खून, भर्ती मरीज के परिजन के आग्रह पर छोड़ा गया डोनर

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। निजी अस्पतालों में कार्य करने वाले मरीज माफिया अब खून का भी सौदा करने लगे हैं। इस बात का खुलासा शनिवार को तब हुआ, जब ब्लड बैंक के कर्मियों ने संदेह में एक डोनर और निजी अस्पताल के एक कर्मचारी को पकड़ लिया।
पूछताछ में यह बात सामने आई कि डोनर पांच हजार रुपये पर खून बेचने के लिए आया था। एक यूनिट का पांच हजार डोनर को देने के साथ ही अस्पताल संचालक मुंहमांगी राशि वसूलते हैं। इस मामले में पुलिस को भी बुलाया गया। बाद में मरीज की पत्नी ने आकर कहा कि यह उसके बेटे का दोस्त है। उसी ने बुलाया है। इसके बाद बिना कार्रवाई के ही छोड़ दिया गया।
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अभी तक दवा और जांच में ही मरीज माफिया मरीजों का शोषण करते थे। वे अभी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के पास बैठकर उनसे गठजोड़ करके मोटी रकम वसूल रहे हैं। शनिवार को निजी अस्पताल में खून की दलाली का मामला सामने आया। इसमें ब्लड देने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे डोनर से एसएलटी ने पूछा कि किसे ब्लड दे रहे हो और रिश्ते में कौन लगता है? यह जानकारी लेनी चाही तो जब तक वह कुछ बता पाता निजी अस्पताल से साथ में एक कर्मी ने पर्चा थमा दिया और बोला कि मरीज उसके दोस्त के पिता हैं। जब दोस्त का नाम पूछा तो वह डोनर नहीं बता सका। पर्चा भी निजी अस्पताल का था। संदेह होने के बाद दोनों को स्टाफ ने रोक लिया। प्राचार्य को जानकारी दी। उसके बाद उन्होंने पुलिस को बुला ली।
पूछताछ में पता चला कि डोनर पांच हजार रुपये में खून देने के लिए आया था। उसने इस बात की पुष्टि खुद की। इसके बाद मरीज की पत्नी को बुलाया गया, उसने कहा कि बेटे का दोस्त है। वही जानता है कि कितना देना है। हम बहुत गरीब हैं। खून की जरूरत है। मरीज की हालत बिगड़ रही है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई शिकायती पत्र नहीं मिला। इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया।
महराजगंज से आया था खून बेचने
जिला अस्पताल महराजगंज में 13 दलालों के खिलाफ एफआईआर जैसी बड़ी कार्रवाई होने के बाद वहां के दलाल सिद्धार्थनगर में आने लगे हैं। पकड़ा गया डोनर महराजगंज जिले के फंरेदा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। बीमार मरीज जोगिया कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का निवासी है। अस्पताल उसका रोड पर स्थित है। जहां व्यक्ति का ऑपरेशन होना है, वह पांच दिन से भर्ती है। दूसरी बार ब्लड लेने के लिए पहुंचे थे। पता चला है कि पहले भी एक व्यक्ति महाराजगंज से खून बेचने आया था। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि मरीज की स्थिति बड़ी दयनीय थी, इसलिए समझा-बुझाकर छोड़ दिया गया।


खून का खेल, एक यूनिट की कीमत 15-20 हजार

स्वास्थ्य विभाग के से जुड़े लोगों के मुताबिक निजी अस्पताल में खून की दलाली होती है। जिस मरीज को खून की जरूरत होती है, उसके परिजन को तत्काल ब्लड की जरूरत है। अगर डोनर न हो तो बताओ, लेकिन 15 से 20 हजार रुपये एक यूनिट ब्लड का लगेगा। फिर क्या, मरता क्या नहीं करता। मरीज के परिजन तैयार हो जाते हैं। अस्पताल में रुपये पर डोनर ढूंढने वाले तैयार रहते हैं। डोनर को पांच से सात हजार में तैयार करते हैं। अस्पताल से डिमांड बनती है। ब्लड बैंक तक अस्पताल का कर्मी लेकर जाता है। 1050 रुपये थैले का शुल्क जमा करता है और 25 हजार रुपये का काम हो जाता है। इससे ब्लड बैंक के कर्मी अनजान रहते हैं। कभी-कभार ही संदेह होने पर मामला पकड़ में आता है।



एचआईवी पॉजिटिव है मरीज
निजी अस्पताल में भर्ती जिस मरीज के लिए डोनर रुपये लेकर खून देने आया था, वह मरीज एचआईवी पॉजिटिव है। यदि वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती होता है तो उसे निशुल्क खून मिल जाता। पुलिस की पूछताछ में डोनर से बताया कि उसे खून के बदले 5000 रुपये मिलने थे, लेकिन महिला ने दबी जुबान से बताया कि निजी अस्पताल के डॉक्टर ने कहा था कि 10 हजार रुपये में एक यूनिट खून मिल जाएगा। किसी ने तहरीर नहीं दी और इस मामले की जांच नहीं हो सकी। इसलिए पता नहीं चला कि डॉक्टर ने खून का सौदा कितने रुपये में किया था।
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कोट
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में रुपये लेकर खून देने आए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। दलालों पर हर हाल में अंकुश लगाया जाएगा।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी
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