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Siddharthnagar News: रफा दफा न होता मामला तो पकड़ा जाता खून के दलालों का बड़ा नेटवर्क

Sat, 11 Nov 2023 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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पीडीएफ-
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फोटो मेडिकल कॉलेज में सात अक्तूबर को रुपये लेकर खून देने आया था महराजगंज का डोनर
सीसीटीवी फुटेज से नहीं हुई जांच, डोनर के माध्यम से पकड़े जा सकते थे निजी अस्पताल के दलाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में बीते सात अक्तूबर को पूछताछ में ऐसे युवक को पकड़ा गया था, जो रुपये लेकर अपने परिचित मरीजों के लिए खून बेचने आया था। इस मामले में पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डोनर से माफीनामा लिखवाकर छोड़ दिया। इसी डोनर के माध्यम से खून की दलालों को पकड़ा जा सकता था।
इसका नुकसान यह हो है कि खून की दलाली चर्चा में आने के बाद शिविर के रक्तदाता कम हो गए और ब्लड बैंक में भी खून की कमी से गंभीर मरीजों के इलाज पर संकट खड़ा हो रहा है।
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दो माह पहले महराजगंज जिला अस्पताल में छापा के दौरान 13 दलालों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। उसके बाद वहां दलाली पर अंकुश लगा। ब्लड बैंक में पकड़ा गया डोनर महराजगंज से ही आया था, लेकिन उसे छोड़ दिया गया। लोगों में चर्चा यह भी है कि महराजगंज के दलालों ने यहां अपनी घुसपैठ बना ली है।
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि ब्लड बैंक के सीसीटीवी कैमरे के माध्यम जांच होती है तो दलालों को पकड़ा जा सकता था। जैसे ही युवक को पकड़ा गया तो उसके बचाव की सिफारिश करने वाले दो लोग मौके से फरार हो गए थे। इस कैमरे में दस दिन तक ही फुटेज सुरक्षित रहता है । इस कारण यह बड़ी लापरवाही हुई और इस मामले में दलालों तक पहुंचना कठिन हो गया।

सक्रिय हैं निजी अस्पतालों के दलाल
आज के दौर में भी कुछ लोगों में जागरूकता की कमी है कि खून देने से शरीर में कमजाेरी आती है। इसी भ्रांति का फायदा उठाकर कुछ निजी अस्पतालाें के दलाल काली कमाई कर रहे हैं। सात अक्तूबर को महराजगंज का डोनर जिस मरीज के लिए खून देने आया था वह निजी अस्पताल में भर्ती थी, जबकि मेडिकल कॉलेज से सौदा होने के बाद लाइफ हॉस्पिटल पहुंची प्रसूता कुसुम को दो यूनिट खून चढ़ाने के लिए 20 हजार रुपये की दलाली हुई थी। हालांकि, परिवार के लोगों को पता नहीं है कि खून मरीज को चढ़ाया गया था या नहीं।-
दलाली के शोर में कम हो गए कैंप के डोनर
फोटो-
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक से खून की दलाली के शोर में स्वैच्छिक रक्तदाता कम हो गए हैं। रक्तदाता अखिलेश जायसवाल का कहना है कि उनके पास रक्तदाताओं की टीम है। जब पता चलता है कि किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचाने के लिए खून की आवश्यकता है तो संबंधित ग्रुप के लोग रक्तदान करने जाते हैं। इसी प्रकार रक्तदाता नागेश्वर दूबे ने कहा कि हम रक्तदान इसलिए करते हैं कि मरीज की जान बच जाए, लेकिन इस खून की दलाली होना ठीक नहीं है। ब्लड बैंक में निगेटिव के ग्रुप के रक्त का अभाव हो गया है। रक्तदाता रक्तदान करते तो ऐसी स्थिति नहीं आती।

एक माह पहले था 100 यूनिट, अब मात्र 34
ब्लड बैंक में 3 अक्तूबर को 100 यूनिट खून था, लेकिन शुक्रवार को मात्र 34 यूनिट खून था। एबी पाॅजिटिव, ओ, ए, बी निगेटिव ग्रुप का एक यूनिट भी खून नहीं था, जबकि एबी निगेटिव ग्रुप का मात्र एक यूनिट खून था। इन ग्रुप के गंभीर मरीजों की जान बचाने में खून की जरूरत पड़ने पर रेफर करना पड़ रहा है।
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वर्जन
ब्लड बैंक में सात अक्तूबर को जो युवक रुपये के बदले खून देने आया था, उसने बताया कि वह अनपढ़ है और उसे पता नहीं था कि खून बेचना अपराध है। इसलिए माफीनामा लिखवाकर उसे छोड़ दिया गया। पुलिस ने एफआईआर कराने की बात की, लेकिन उसे खून देने से पहले पकड़ लिया गया था, उसने खून दिया नहीं था। इस कारण एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। सीसीटीवी फुटेज से जांच नहीं की गई थी।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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