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ब्लॉक का चक्कर लगा रहे ग्रामीण

Sun, 28 Aug 2016 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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खेसरहा क्षेत्र में बदहाल पड़ा मिनी सचिवालय। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खेसरहा। ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण, पत्रावलियों के रख-रखाव व विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों में बनाए गए मिनी सचिवालय बदहाल हो गए हैं। देखरेख के अभाव में इनका कोई पुरसाहाल नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को ब्लाक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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वर्ष 2009-10 में 15 लाख की लागत से क्षेत्र में दर्जनों मिनी सचिवालयों का निर्माण कराया गया था। निर्माण के बाद से ही न तो यहां कोई कर्मचारी बैठा और न ही ग्रामीणों से जुड़ी कोई पत्रावली रखी गई। नतीजन देखते ही देखते यह भवन खंडहर में तब्दील हो गए।
ग्राम पंचायत बेलवाल गुनही, कोहड़ी, बिशुनपुरवा, सिरसिया चौबे, महुआ, बसखोरिया, सेखुई में बना मिनी सचिवालय बदहाली का गवाह है। क्षेत्र के श्यामधर यादव, प्रदीप पांडेय, विंध्याचल, तीजू साहनी, दिग्विजय पांडेय, लक्ष्मी मोदनवाल, सुनील मिश्र आदि का कहना है कि उनकी ग्राम पंचायतों में जब मिनी सचिवालय का निर्माण हुआ तब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ गांव में ही मिलने की आस जगी थी। खुशी थी कि अब परिवार रजिस्टर की नकल सहित ग्राम पंचायत सचिव स्तर के काम के लिए ब्लाक का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
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मिनी सचिवालय के निर्माण के बाद एक दिन भी सचिव नहीं बैठे और न ही कभी ग्राम पंचायत की बैठक हुई। अब मिनी सचिवालय भवन जंगली जानवरों का बसेरा बन कर रह गया है। इस संबंध में प्रभारी एडीओ पंचायत लाले ने कहा कि अधिकांश मिनी सचिवालय अभी तक ग्राम पंचायतों को हैंडओवर नहीं हुए है। इसलिए उसी हालत में रहेंगे। जर्जर भवन की मरम्मत जल्द करा दी जाएगी।
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