एक पखवाड़े से क्षेत्र के परसपुर गांव में फैले खसरे का प्रकोप अभी स्वास्थ्य विभाग कंट्रोल तक नहीं कर पाया था कि उसके पहले ही बगल के गांव बहेरिया व हजिरवा गांव में भी खसरे ने दस्तक दे दी है।
स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना ग्रामीणों ने दी तो वे महज एक स्वास्थ्य कर्मी को गांव में भेज कोरम पूरा कर दिया। पीड़ितों को दवा तक नहीं बांटी गई।तहसील क्षेत्र के परसपुर गांव में करीब 15 दिनों से खसरा ने अपना पांव पसार रखा है। इस बीमारी की जद में गांव के दर्जन भर से अधिक लोग अभी भी है।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग के तीन डाक्टरों की टीम पहुंच कर पीड़ितों में दवा वितरण किया था। परसपुर में अभी लोगों को कुछ राहत मिलती कि उसके पहले ही बगल के गांव बहेरिया व हजिरवा गांव में भी खसरे ने दस्तक दे दी।हजिरवा गांव की दलित बस्ती के लगभग सभी घरों में खसरे का प्रकोप है।
वहीं बहेरिया गांव में करीब आधा दर्जन मासूम इस बीमारी से कराह रहे हैं। बहेरिया गांव के सर्वेश पांडेय (6 साल), हजिरवा गांव की पिंकी (4 साल) और खुशबू (5 साल) सहित कई मासूम खसरे की जद में हैं।
बहेरिया गांव निवासी शशि पांडेय, विजय लक्ष्मी व हजिरवा के भाईलाल, मंगन गौतम आदि ने बताया कि गांव में खसरा फैलने की जानकारी दूरभाष से बेंवा सीएचसी के अधीक्षक को दी गई थी, लेकिन गांव में टीम को दवा के साथ भेजने के बजाय सिर्फ एक स्वास्थ्यकर्मी को ही भेज दिया। गांव में आई एएनएम ने गांव में पीड़ितों को आवश्यकता वाली दवा के बजाय दूसरी दवा देकर चली गई।
लोगों ने स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा के अधीक्षक डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि सूचना मिली थी। स्वास्थ्यकर्मी को गांव भेजकर दवा वितरित करने का आदेश दिया गया है। गांव पर नजर रखी जा रही है। जो भी जरूरत होगी, सभी व्यवस्था की जाएगी।