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Siddharthnagar News: अफसरों की जांच से पहले मरीज माफिया तक पहुंच जाता है अलर्ट

Mon, 27 Nov 2023 02:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया अच्छे उपचार का झांसा देकर मरीज को निजी अस्पतालों को बेच रहे हैं। यहां मरीज माफिया की जड़ें इतनी गहरी है कि जब अधिकारी जांच करने आते हैं तो वे बच निकलते हैं। कारण यह है कि अफसरों की जांच से पहले मरीज माफिया तक उनके आने की सूचना पहुंच जाती है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री का आदेश भी ठेंगे पर रखकर मनमानी कर रहे हैं। इमरजेंसी में स्वास्थ्य कर्मियों को आई कार्ड नहीं लटकाने के लिए यह तय करना कठिन हो गया है कि कौन कर्मचारी है और कौन दलाल, जबकि स्वास्थ्य कर्मियों में आई कार्ड बांटे गए हैं। मरीज माफिया इतने बेखौफ है कि शनिवार को मेडिकल कॉलेज में निजी एंबुलेंस संचालक से एक मरीजों को जबरिया निजी अस्पताल लेकर जाने का दबाव बनाने को लेकर विवाद भी हुआ था। रविवार को जब मेडिकल कॉलेज की पड़ताल की गई तो यहां परिसर के अंदर इमरजेंसी के पास और स्टोर रूम के बगल में दो स्थानों पर निजी एंबुलेंस खड़ी मिली।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में शनिवार को चिल्हिया क्षेत्र का एक व्यक्ति मरीजों को लेकर पहुंचा था। डॉक्टरों ने उपचार के बाद हालत नाजुक देखकर बीआरडी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मरीज को रेफर होता देखकर वहां पहले से मडराने वाला एक दलाल जो एंबुलेंस संचालक बताया जाता है, वह पहुंचा और निजी अस्पताल में लेकर जाने के लिए अपने झांसे में ले लिया। निजी एंबुलेंस वाला भड़क गया और धमकी देने लगा कि वे जहां चाहेंगे, वहीं मरीज भर्ती होगा। विवाद को बढ़ता देख व्यक्ति ने सदर थाने पर सूचना दे दी। पुलिस के पहुंचने से पहले धमकी देने वाला भाग खड़ा हुआ। इसके बाद मरीज के परिजनों ने किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचने की बात करते हुए सरकारी एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज चले गए। इतना होने के बाद भी एंबुलेंस कर्मियों को डर नहीं है। इस बवाल के दूसरे दिन रविवार को जब मेडिकल कॉलेज की पड़ताल की गई तो जहां हर दिन गेट के बाहर एंबुलेंस दिखती थी वह इमरजेंसी गेट और स्टोर रूम में पास खड़ी थी। अस्पताल के एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह लोग पूरी रात कब्जा जमाए रहते हैं। जैसे कोई गंभीर मरीज आता है। परिजनों को बरगलाकर की यहां इलाज सही से नहीं होता, जान जा सकती। यह कहते हुए उन्हें से कहलवाकर रेफर करवाते हैं और निजी अस्पताल में लेकर जाकर सौदा कर देते हैं। इमरजेंसी में मरीज लेकर आए रमेश ने बताया कि वह अकसर गांव के लोगों का इलाज कराने के लिए रात और दिन में इमरजेंसी में आ जाते हैं। यहां कई प्रकार के दलाल मिलते हैं, रात में तो इनसे तकरार करने पर कुछ भी हो सकता है। इस प्रकार मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं का कब्जा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन कार्रवाई के लिए ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
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बुलाने के बाद सरकारी एंबुलेंस वालों का करते हैं मना



अस्पताल में कार्य करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि हर दिन दो चार मरीज इनके चंगुल में फंस जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस पर कॉल करके बुलाने के बाद जब यह जान जाते हैं तो मरीजों को कई प्रकार से भरमाते हैं। जिदंगी और मौत की बात करते हैं। ऐसे में घबरा हुआ व्यक्ति इनकी बातों में आकर इनके साथ चलने के लिए राजी हो जाता है। कॉल करने वाला खुद सरकारी एंबुलेंस को दोबारा सेवा नहीं लेने के लिए कहकर मना कर देता है। ऐसा हर दिन हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी कुछ कर नहीं सकते हैं। क्योंकि रेफर होने के बाद मरीज के परिजन पर निर्भर होता है कि वह कहां लेकर जाएगा।



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ओटी में रुपये मांगने की शिकायत



मेडिकल कॉलेज में शनिवार को ही एक युवक ने ऑपरेशन के नाम पर रुपये मांगने और विरोध करने पर मोबाइल छीन लेने और धमकी देने का आरोप लगाया। इस मामले की उसने प्राचार्य से मौखिक शिकायत की, लेकिन खुद अस्पताल से जुड़ा कर्मचारी होने के कारण फिर उसने कागजी शिकायत और कार्रवाई नहीं करने की बात करते हुए मामले को रफादफा कर लिया। इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि लिखित शिकायत नहीं मिलने के कारण जांच नहीं की जा रही है।



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हमेशा विवाद, रिकार्डिंग के लिए नहीं लगा है कैमरा

माधव प्रसाद त्रिपाठी में सीसी कैमरा तो लगा है, लेकिन उसमें रिकार्डिंग की कोई सुविधा नहीं है।एनएमसी की ओर से लगाए गए कैमरे का उद्देश्य है कि शासन स्तर से अस्पताल संचालन की लाइव मॉनिटरिंग की जा सके। रिकार्ड होने की कोई व्यवस्था नहीं है। यह हाल तब है, जब इमरजेंसी में अकसर विवाद होता रहा है। कई बार तीमारदार स्वास्थ्य कर्मियों से टकरा जाते हैं। वहीं, संदिग्ध चेहरे को जो घूमते हैं, उनके गतिविधि के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है।

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आगे नहीं आते हैं जिम्मेदार

अस्पताल में दवा की दलाली करते हुए लोग कई बार पकड़े गए हैं। मामले में शिकायत थाने तक पहुंची है। पुलिस पकड़कर संदिग्धों को लेकर गई भी है। लेकिन शिकायत दर्ज कराने की बात जब आती है तो जिम्मेदार लिखित तहरीर देने से इन्कार कर देते हैं। ऐसे में चाहे दवा, जांच और निजी एंबुलेंस वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसलिए मरीजों का शोषण का सिलसिला रूक नहीं रहा है।

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निजी एंबुलेंस वाले सरकारी सेवा में लगे एंबुलेंस कर्मियों को परेशान करते हैं या फिर मरीज नहीं ले जाने देते हैं। ऐसी शिकायत अभी तक किसी 102 और 108 एंबुलेंस चालक की ओर से नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत करता है कि मरीज ले जाने से रोका जा रहा है। उनसे बदसलूकी जा रही है तो उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया जाएगा।

-अजय यादव, प्रभारी 108 व 102 एंबुलेंस सेवा सिद्धार्थनगर

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विवाद होने के सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस टीम गई थी। किसी ने शिकायती पत्र नहीं दिया था। समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया दिया गया। अगर शिकायती पत्र मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी।

-गौरव सिंह, शहर कोतवाल

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मेडिकल कॉलेज परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी होने और अन्य दलालों की घुसपैठ रोकने के लिए सीएमओ, सीएमएस को निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी
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