सिद्धार्थनगर। बोर्ड की पहली बैठक से पहले ही नगर पालिका में विवादों की नींव पड़ गई है। कार्यालय में नाम पट्टिका लगाने को लेकर नवनिर्वाचित सभासद और चेयरमैन में रार छिड़ गई है। सभासदों ने चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को खजुरिया रोड पर गोपनीय बैठक कर अगले कदम की रूपरेखा भी तैयार की। इस बैठक में कुल 25 में से दो तिहाई से अधिक सभासद व उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसमें कुछ ऐसे भी सभासद शामिल रहे, जो भाजपा के सिंबल पर निर्वाचित हुए हैं। चेयरमैन के रवैए पर आपत्ति जताते हुए 23 दिसंबर को होने वाली बोर्ड की पहली बैठक में अपनी बात को दमदारी से रखने का निर्णय लिया गया।
विवाद की शुरुआत बुधवार को तब हुई जब अचानक सभासदों का नाम लिखा बोर्ड कार्यालय में टांग दिया गया। सूत्रों की मानें तो यह बोर्ड बिना चेयरमैन की सहमति के ही लगा दिया गया था। लिहाजा जब चेयरमैन कार्यालय पहुंचे तो बोर्ड देख नाराज हो गए। पूछताछ की तो दलील दी गई कि पूर्व के कार्यकाल में ऐसा हुआ था। बताते हैं कि बिना सूचना या सहमति के बोर्ड टांगने पर चेयरमैन ने तल्ख आपत्ति जताई, जो सभासदों को नागवार लगी। इसे लेकर देर शाम हुई बैठक में भी तनातनी की स्थिति बन गई। इसके बाद गुरुवार को सभासदों ने गोपनीय बैठक की। खजुरिया रोड पर हुई बैठक में दो तिहाई सभासद व उनके प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में चेयरमैन के रवैए पर सभी ने एक स्वर में आपत्ति जताई। नाम न छापने की शर्त पर एक सभासद ने बताया कि बोर्ड हटाने को लेकर चेयरमैन का रवैया उचित नहीं था।
वार्ता में भी उन्होंने सभासदों से सही व्यवहार नहीं किया। सभासदों को इसी पर आपत्ति है। अब 23 दिसंबर को प्रस्तावित बोर्ड की बैठक में सदस्य अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगे। निर्णय लिया गया है कि यह रवैया नहीं सुधरा तो सभासद विरोध भी करेंगे। उधर, इस बाबत चेयरमैन श्याम बिहारी जायसवाल का कहना था कि कार्यालय में अध्यक्ष का ही कक्ष है, इसमें बमुश्किल 6-7 लोग बैठ सकते हैं। बावजूद 25 सभासदों का बोर्ड यहां कुछ लोगों ने मनमाने ढंग से लगा दिया। किसी भी पालिका, पंचायत या संस्था में ऐसी परंपरा नहीं है। सदस्यों को अगर कोई जरूरत हो तो वह नियमानुसार मांग करें। जहां तक संभव होगा, उपलब्ध कराया जाएगा। कुछ लोग साजिश के तहत माहौल खराब कर रहे हैं, ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।