सिद्धार्थनगर। हर साल चुनाव आते ही बढ़नी चाफा और कठेला को अलग ब्लॉक बनाने का मुद्दा गर्म हो जाता है। वर्षों से लोग यह आवाज उठाते रहे हैं। चुनावों में इसे तवज्जो भी मिलती है, लेकिन बाद में सब शांत हो जाता है। ब्लाक कार्यालय से दूरी के चलते यह क्षेत्र विकास से कटे हुए हैं। इन दोनों इलाकों को ब्लाक का दर्जा दिलाने की मांग फिर से गर्म हो गई है।
क्षेत्रीय लोग इस मांग को पूरा करने के लिए जोर-शोर से आवाज उठाने की तैयारी में हैं। 135 ग्राम पंचायतों वाला डुमरियागंज ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक गांव बलरामपुर की सीमा से लगे हुए हैं। ब्लॉक कार्यालय से 15-20 की दूरी के चलते यहां के गांव अलग-थलग पड़े हुए हैं। विकास की किरण इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रही। ग्रामीणों को लंबी दूर तय कर ब्लॉक कार्यालय आने में दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति कठेला क्षेत्र के लोगों की भी है। इटवा तहसील कार्यालय से अधिक दूरी विकास में बाधा बनी हुई है। इन दुश्वारियों को देखते हुए ही पूर्व के चुनावों में इन दोनों क्षेत्रों को ब्लाक बनवाने का वादा किया गया था।
डुमरियागंज की ढाई दर्जन ग्राम पंचायतों को लेकर बढ़नी चाफा में अलग ब्लॉक बनाने का वादा हुआ था तो इटवा के कठेला और खुनियांव की गौरडीह न्याय पंचायतों को शामिल करते हुए नए कठेला ब्लाक के गठन का आश्वासन दिलाया गया। तब से कई चुनाव बीत चुके, मगर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इन क्षेत्रों से निर्वाचित प्रतिनिधियों की शासन-सत्ता में मजबूत पकड़ के बाद भी जनता की यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
डुमरियागंज/इटवा। ब्लॉक बनाने के नाम छलते आ रहे क्षेत्र के लोग इस बार मुखर हैं। चुनाव में इस मुद्दे को जोर-शोर से उछालने को तत्पर बने हुए हैं। उनका कहना है कि नेताओं ने सिर्फ उन्हें छला है। किसी ने भी इस उपेक्षित क्षेत्र के विकास में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस बार उनसे जवाब लिया जाएगा।
बढ़नी चाफा के मजहर अली का कहना है कि नया ब्लॉक बनता तो विकास को रफ्तार मिलती। ब्लाक की अलग कार्ययोजना, अलग बजट होता। छोटा इलाका होने से अधिकारियों को भी इन गांवों के विकास की सही मॉनिटरिंग में सहूलियत मिलती। किसी भी नेता ने चुनाव से इतर इस मुद्दे को नहीं उठाया। जंगलीपुर के महबूब अली कहते हैं कि वादे बहुत हो चुके। अब इसे सिरे चढ़ाने वाले की जरूरत है। जनता का समर्थन पाने के लिए नेताओं को अपने एजेंडे में यह मुद्दा शामिल करना होगा। उधर, कठेला ब्लाक बनाओ संघर्ष समिति के दलश्रृंगार दुबे का कहना है कि ब्लॉक कार्यालय से दूरी के चलते पर्याप्त विकास नहीं हो पा रहा। इसके लिए अलग ब्लाक का गठन जरूरी है। रामबदन पाठक ने कहा कि अगर राजनीतिक स्तर पर सही पैरवी होती तो कठेला को ब्लाक का दर्जा मिल गया होता।