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आफत बना बैरियर : फंसी चाबी, 52 मिनट जाम से जूझा शहर

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सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन के पास शहर के बीच रेलवे क्राॅसिंग पर बैरियर गिरने के बाद फंस गई थी चाबी
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11.55 से दोपहर 12.47 बजे तक बंद रहा गेट, लगा रहा जाम

दोनों तरफ लग गई वाहनों की लंबी कतार, धूप और उमसभरी गर्मी से परेशान हुए लोग

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। गोरखपुर-गोंडा रेलखंड पर स्थित सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन के पास बीच शहर में बने रेलवे क्राॅसिंग का बैरियर शनिवार को गिरने के बाद उसकी चाबी फंस गई। इस वजह से बैरियर उठ नहीं सका। इससे पूरा शहर जाम से जूझ गया। तेज धूप में लोग परेशान हो गए। वहीं शहर दो हिस्से में भी बंट गया। इस बीच दो ट्रेनें गुजर गईं। कड़ी मश्क्कत के बाद 52 मिनट बाद रेलवे क्राॅसिंग खुला तो लोगों ने राहत की सांस ली। लोग रेलवे कर्मियों को कोसते नजर आए और व्यवस्था पर सवाल उठाया।

रेलवे स्टेशन के पास बीच शहर में रेलवे क्रॉसिंग है, जो शहर को दो हिस्से में बांटता है। ट्रेन के आवागमन होने के दौरान रेलवे क्राॅसिंग दिन और रात में कई बार बंद होता है। शनिवार दोपहर 11.55 बजे लखनऊ से चलकर गोरखपुर जाने वाली ट्रेन संख्या 4052 गोंडा की ओर से आ रही थी। ट्रेन के आने का संकेत होने के बाद गेटमैन ने क्राॅसिंग बंद कर दिया। ट्रेन गुजरने के तय समय बाद जब गेटमैन गेट खोलने गया तो चाबी फंस गई। पहले उसने खुद कई बार चाबी निकालने का प्रयास किया, लेकिन जब नहीं निकली तो अन्य रेलवे कर्मियों को इसकी सूचना दी। पहुंचे अन्य कर्मियों ने भी प्रयास किया, लेकिन गेट नहीं खुला। तब तक दोपहर 12.30 बज चुका था। इसी बीच फिर संकेत मिला कि गोरखपुर-नरकटियागंज ट्रेन आ रही है। रेलवे कर्मियों ने सोचा कि ऑटोमेटिक लॉक होता है, ट्रेन के गुजरने के हो सकता है चाबी काम कर जाए। लेकिन ट्रेन के गुजरने के बाद भी चाबी फंसी रही। इसके बाद रिंच लगाकर लॉक को खोलकर चाबी निकाली गई। तब तक 12:47 बज चुका था। इधर क्राॅसिंग के दोनों तरफ एक किलोमीटर से अधिक जाम लग गया था। लोग जाम में फंसकर परेशान दिखे। कड़ी धूप से शरीर तपा रहा था। जाम में फंसे लोग रेलवे को कोसते रहे। 52 मिनट बाद गेट खुला, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
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पीछे वाले निकल गए, जो बीच में फंसा वह फंसा रहा

गेट बंद होने के बाद अमूमन 10-15 मिनट में जाम खत्म हो जाता है। लेकिन शनिवार को जब बैरियर गिरा तो शहर के दो हिस्से में एक किलोमीटर तक जाम लगा गया। इसमें पीछे से आने वालों को पुलिस कर्मियों ने घुमा दिया तो वह ओवरब्रिज और सिंहेश्वरी मंदिर रेलवे क्राॅसिंग से निकल गए। लेकिन जो आगे हो गए थे या फिर बीच में फंसे थे। उन्हें पूरा 52 मिनट कड़ी धूप में तपना पड़ा। ओवरब्रिज से शहर में इधर से उधर होने में लोगों को एक किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ा।

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जान जोखिम में डाल बैरियर के नीचे से गुजरते रहे लोग

गिरने के बाद काफी समय तक जब बैरियर नहीं खुला तो लोगों का सब्र टूटने लगा। इस बीच जान की बाजी लगाकर लोग बाइक को नीचे झुकाकर क्राॅसिंग को पार करते रहे। जल्दी इतनी थी कि उन्हें जान की परवाह नहीं थी। बाइक सवार और पैदल लोग रेलवे क्राॅसिंग पार कर रहे थे।

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बोले जाम में फंसे लोग

यह रेलवे की लापरवाही है, गेट पर तैनात कर्मी की ड्यूटी होती है कि वह चेक करता रहे और गड़बड़ी मिलने पर उसे दुरुस्त करे। लोगों का एक-एक मिनट कीमती है।

रिपुंजय राय, एमआर
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कड़ी धूप के बीच बैरियर में फंस जाएंगे यह जानकारी नहीं थी। आगे थे इसलिए निकल पाना भी मुश्किल था। धूप के बीच जाम में खड़ा होना मजबूरी थी। अगर पीछे होते तो किसी तरह से निकल जाते।

अरुण पाठक, दवा कारोबारी

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अक्सर बैरियर के अटकने के मामले में सामने आते हैं। कई बार ऐसा हो चुका है, लेकिन रेलवे की ओर से इसमें सुधार नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से जाम में फंसना पड़ा।
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आदिल अंसारी

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रेलवे प्रशासन शिथिल है, बैरियर गिर गया और जाम लग गया। लेकिन रेल कर्मियों के पास कोई उपाय नहीं था। चाबी खोलने के लिए सामान तक नहीं रखें हैं। चार बार रेलवे स्टेशन पर चक्कर लक्ना पड़ा। लापरवाही के कारण लोगों को इतने समय तक जाम से जूझना पड़ा।

सुल्तान, राहगीर

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बोले अधिकारी

सिग्नल में खराबी होने के कारण समस्या आई थी। इसलिए रेलवे गेट कुछ समय के लिए बंद था। उसके सही होते ही गेट खुल गया और आवागमन बहाल हो गया।

डीके उपाध्याय, स्टेशन अधीक्षक सिद्धार्थनगर
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