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छोटी हुई बैंक की लाइन, एटीएम पर भीड़ कायम

Wed, 28 Dec 2016 11:23 PM IST
सिद्धार्थनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
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बैंक लगी लाइन फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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बैंक से पैसे लेने की मारामारी कुछ कम हुई है। नोटबंदी के पचासवें दिन जिले के अधिकतर बैंक शाखाओं पर लेन-देन सामान्य रहा। मौजूद कैश के आधार पर बैंकों ने खाताधारकों को पैसा उपलब्ध कराया। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों की स्थिति थोड़ी खराब रही, क्योंकि उनके पास पर्याप्त कैश नहीं पहुंच सका। इसलिए लेन-देन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ठंड की वजह से भी लोगों का रुख बैंक शाखाओं की ओर कम और एटीएम पर अधिक रहा।
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नोटबंदी के बाद पर्याप्त कैश की अनुपलब्धता के बीच लोगों की परेशानियां अब कम होती नजर आ रही हैं। बैंक शाखाओं पर पर्यापत पैसा पहुंचने के बाद लेन देन का काम बुधवार को सामान्य रहा। बैंकों में पैसा निकालने के लिए लगने वाली लाइनें भी अब छोटी हो चली हैं। एसबीआई मुख्य शाखा में उपलब्ध कैश के अनुसार आवेदकों को दो से चार हजार रुपये मिले वहीं प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने 24 हजार तक की निकासी सहूलियत मुहैया कराई। प्राइवेट सेक्टर के एटीएम भी पैसा उगलते मिले, जिससे लोगों को काफी सहूलियत मिली। ग्रामीण क्षेत्र के कुछ बैंको में कैश न होने से लोगों को निराश होना पड़ा। पीएनबी परसा और पूर्वांचल ग्रामीण बैंक कलेनिया में कैश न होने के कारण खाताधारकों को निराश लौटना पड़ा। स्टेट बैंक भनवापुर और चौखड़ा में भरपूर कैश होने के लिहाज से लोगों को 24 हजार तक के निकासी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। भनवापुर में एसबीआई की लाइन में लगे लोगों ने बताया कि पैसा तो पर्याप्त निकल रहा, पर बैंक कर्मियों की लापरवाही से लोगों को घंटो लाइन में खड़ा रहना पड़ा। पुराने नोट जमा करने में भी लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी नोट बंाटने में जहां तेजी दिखाई गई वहीं जमा करने वालों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
ग्राहकों में संतोष तो कहीं नाराजगी
पिपरा भोज निवासी अब्दुल समद का कहना है कि उन्हें अपने लड़के को सऊदी अरब भेजना है पर पैसा कम निकलने के कारण वह नहीं भेज पा रहे। दस हजार रूपए से अधिक न मिलने के कारण दिक्कत हो रही है। घंटों लाइन में लगना भारी पड़ रहा। मधुबेनियां की कौशिल्या देवी का कहना है कि ननद की शादी है। रुपये की किल्ल्त के बीच वह रोज लाइन में लगकर पैसा निकालने को बाध्य हैं। पुरानी नौगढ़ की कमलावती का कहना है कि बैंक में पर्याप्त पैसा होते हुए भी लोगों को दो हजार से दस हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं, जिससे परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। प्रतिदिन पैसे के लिए बैंक आना दिक्कत भरा काम है। थरौली निवासी अजय कुमार का कहना है कि बैंक से पैसे निकल रहे हैं, इतना बहुत है। पहले तो लाइन में लगने के बाद भी नो कैश के कारण लोगों को निराश लौटना पड़ता थ अब वह स्थिति नहीं है।
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ग्रामीण शाखाओं में पहुंचेगी रकम : लीड बैंक
लीड बैंक अधिकारी कल्पनाथ ने बताया कि मुख्यालय के सभी बैंकों में पर्याप्त कैश है। ग्रामीण क्षेत्र के कुछ बैंकों में पैसा नहीं पहुंच पाया है जिससे लोगों को दिक्कत हो रही शीघ्र ही ग्रामीण शाखाओं में कैश पहुंचाया जाएगा। पहले से स्थिति अब काफी बेहतर है और निर्वाध लेन-देन चल रहा है।
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