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Siddharthnagar News: नौकरी का झांसा देकर ठगी करने के अभियुक्त की जमानत अर्जी खारिज़

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एसएससी जीडी बोर्ड में अपनी पकड़ बताकर 4,65,000 रुपये ले लिए थे
संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले थाना उसका बाजार क्षेत्र के कोल्हुआ टोला खैरा निवासी सतीश यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मामला उसका बाजार थाना में दर्ज हुआ था।
उसका बाजार थानाक्षेत्र के ग्राम महुआ, वार्ड नंबर छह अशोक नगर, नगर पंचायत उसका बाजार निवासी महेंद्र मिश्र ने पुलिस को तहरीर दी थी। कहा कि उनके पुत्र चंद्रमौली मिश्रा ने एसएससी जीडी प्रतियोगी परीक्षा में भाग लिया था। उसके मित्र सतीश यादव की पहचान का धनंजय पटेल पुत्र शिवसहाय पटेल निवासी बघाड़ थाना चौरीचौरा, जनपद गोरखपुर, हाल पता तारामंडल गोरखपुर थाना रामगढ़ जनपद गोरखपुर उसके बेटे से सतीश के माध्यम से मिला।
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कहा कि उसकी एसएससी जीडी बोर्ड में पकड़ है। आप नौ लाख रुपये दीजिए आपकी नौकरी लगवा दूंगा। जिस पर उनके बेटे ने चार लाख साठ हजार रुपये धनंजय पटेल को दिया और बाकी रुपये नौकरी लगने के बाद देने की बात तय हुई । धनंजय पटेल ने उनके बेटे को फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर दिया था, लेकिन जब उसने पता किया तो उसका नाम विभाग द्वारा जारी लिस्ट में नहीं था।
इस पर उनके बेटे ने धनंजय पटेल से अपना रुपये वापस मांगे तो उसने उसका बाजार में आकर 40 हजार रुपये खाते में और दो चेक 2.10 लाख एवं 2.10 लाख रुपये के दस्तखत करके दिए। उन लोगों ने उनके बेटे को नौकरी का झांसा देकर लगातार ठगी व धोखाधड़ी की। इस मामले में 4-5 अज्ञात एवं धनंजय की प्रेमिका भी भागीदार है।
उन लोगों ने उनके बेटे के समस्त शैक्षिक प्रमाणपत्र अपने पास रख लिए हैं। शैक्षिक प्रमाणपत्र के बदले में पांच लाख रुपये की मांग भी कर रहे हैं। जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इन जालसाजों का बहुत बड़ा गैंग है। साथ ही ये छात्रों को चंगुल में फंसाकर रकम उगाहते हैं। मांगने पर हत्या की धमकी देते हैं। यह घटना 20 फरवरी 2023 के शाम आठ बजे की है।
पुलिस ने छल, कपट, फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी, कूटरचना, अमानत में खयानत के अपराध में केस दर्ज कर विवेचना की। विवेचना के बाद कपट, उद्दापन व अमानत में खयानत के अपराध में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद अभियुक्त सतीश यादव ने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की और कहा कि वह बिल्कुल बेगुनाह एवं बेकसूर है। महज गलत तथ्यों के आधार पर अभियुक्त बना दिया गया है।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए सतीश यादव के जमानत प्रार्थनापत्र को खारिज करते हुए आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक, संबंधित थाना प्रभारी व संबंधित न्यायालय को भेजने का आदेश दिया।
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