सिद्धार्थनगर। वृद्धा आश्रम में रहने वाले बाबूलाल ने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए आवेदन किया है। जब वे इस दुनिया से रुखसत हो जाएंगे, उसके बाद भी समाज के काम आएंगे। उनकी शरीर पर मेडिकल छात्र-छात्राएं चिकित्सकीय अध्ययन करेंगे।
शहर के पुरानी नौगढ़ के अपना घर वृद्धाश्रम में रह रहें बाबूलाल ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया है। बाबू लाल शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के परसा गांव के रहने वाले हैं। यह पिछले पांच सालों से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। यहीं पर रहते हुए उन्होंने जाकर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में देहदान करने के लिए इच्छा जाहिर की। मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए आवेदन करने वाले वे पहले व्यक्ति हैं।
उन्होंने बताया कि वह अपने स्वेच्छा से देहदान करने जा रहे हैं, जिससे मरणोपरांत भी उनका शरीर समाज व राष्ट्र के काम आ सके। उन्होंने कहा कि वे जब कानपुर से वापस आए तो बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में देह दान करने के लिए सोच रहे थे। गृह जनपद में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज खुला तो उन्होंने निर्णय किया कि जिले के मेडिकल कॉलेज में देहदान करेंगे, जिससे छात्रों को पढ़ने के लिए प्लास्टिक के बजाय रियल बॉडी मिलेगी, जिससे छात्र छात्राओं को अपने मेडिकल की पढ़ाई करने में आसानी होगी। उन्होंने अपनाघर वृद्धा आश्रम के संचालक सिद्धार्थ गौतम का मोबाइल नंबर दर्ज कराया है।
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वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता
देहदान का संकल्प लेने के मामले में कम लोग ही आगे आते हैं, क्योंकि भारतीय समाज में जो लोग शिक्षित हैं, वे भी परंपराओं को तोड़ पाने में घबराते हैं। यही कारण है कि लोग देहदान करने से कतराते हैं। मरणोपरांत भी लोग या उनके परिवार को शरीर से मोह करते हैं, जबकि देहदान से नश्वर शरीर भी उपयोगी बन जाता है। हिंदू धर्म के मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे जला कर अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से उस व्यक्ति के आत्मा को मुक्ति प्राप्त होने की मान्यता है इसलिए भी लोग देहदान करने के लिए आगे नहीं आते हैं, जबकि मुस्लिम धर्म के अनुसार मृत शरीर को काटना व जलाना नहीं चाहिए इसलिए भी लोग देहदान करने आगे नहीं आते हैं।
एनॉटॉमी विभाग में हैं दस बॉडी
एनाटॉमी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हश्मतुल्लाह खान ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से दस बॉडी दी गईं हैं। ये बॉडी पोस्टमार्टम के बाद मिली है, जबकि देहदान में मिली बॉडी फ्रेश होती है। देहदान करने वाले लोग चिकित्सा शिक्षा में बड़ा योगदान करते हैं।
वृद्धाआश्रम के बाबूलाल ने देहदान का संकल्प लिया है। उनकी सोच अच्छी है और प्रयास सराहनीय है। समाज लोग जागरूक होकर देहदान करेंगे तो चिकित्सा शिक्षा में बड़ा सहयोग प्राप्त होगा। देहदान के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।
- डॉ. एके झा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज