वर्षों से उपेक्षित लोहिया समग्र गांव परसा महापात्र को संवारने में अब प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। कमिश्नर के आगमन की पूर्व संध्या पर गांव में जिम्मेदारों की सक्रियता दिखी। कोई क्षतिग्रस्त को दुरुस्त कराने में जुटा हुआ था तो किसी को महीनों से जमा कचरे के ढेर को हटाने की याद आई थी। आदेशों-निर्देशों की भरमार लगाते हुए अफसर 24 घंटे में सब कुछ ओके कराने की कोशिश में जुटे रहे। हालांकि उनकी इन तमाम कोशिशों के बावजूद कई सवाल ऐसे हैं, जिनमें जिम्मेदारों की गर्दन फंसनी तय है।
बस्ती मंडल के आयुक्त पीके सिंह 26 अप्रैल को उसका बाजार ब्लॉक के लोहिया समग्र गांव परसा महापात्र का निरीक्षण करेंगे। यहां चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं से रुबरु होंगे। आला अधिकारी के आगमन की खबर की वैसे तो कई दिनों पहले ही जिले में आ चुकी थी, मगर अफसरों की नींद तब टूटी, जब 24 घंटे शेष रह गए।
आनन-फानन में भागकर गांव पहुंचे जिला विकास अधिकारी और प्रभारी बीडीओ सुदामा प्रसाद ने मौके की हालत देखी तो माथा पकड़ लिया। गांव में गंदगी का ढेर लगा था। काफी दिनों से झाड़ू नहीं लगा था। जगह-जगह कूड़े के ढेर थे। गांव का मुख्य संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त था।
उबड़-खाबड़ सड़क गड्ढों की भरमार से आवागमन दुरुह बना हुआ था। प्राथमिक विद्यालय के शौचालय की छत भी नहीं पड़ी थी। इंदिरा आवास, पेंशन सहित शासन की प्राथमिकता वाली अन्य योजनाओं में भी तमाम कमियां मिलीं। तत्काल संबंधित कर्मचारियों को तलब करते हुए व्यवस्था दुरुस्त कराने की हिदायत दी। असर यह रहा कि वर्षों से अधूरे काम तेज गति से शुरू करा दिए गए। यह हाल देख हैरान ग्रामीण व्यवस्था पर तंज कसते दिखे। उनका कहना था कि अगर गांव के विकास पर इतनी गंभीरता पहले ही दिखाई गई होती तो शायद ऐन वक्त पर इतनी मशक्कत नहीं करनी होती।