जोगिया ब्लॉक प्रमुख को हटाने के लिए लाया गया था प्रस्ताव, होना था मतदान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जोगिया ब्लॉक प्रमुख के विरूद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को असफल हो गया है। अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में बैठक एवं मतदान के लिए पूर्व निर्धारित तिथि पर एक भी क्षेत्र पंचायत सदस्य नहीं पहुंचा। पीठासीन अधिकारी एसडीएम नौगढ़ डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि एक भी सदस्य के नहीं आने से अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि श्रीष चौधरी के साथ विधायक जयप्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान भी मौजूद रहे।
जोगिया ब्लॉक में कुल 66 क्षेत्र पंचायत सदस्य है। इनमें 37 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जोगिया ब्लॉक प्रमुख सावित्री देवी के विरुद्ध 18 मई को डीएम से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में पत्र सौंपा था। जिसके बाद डीएम पवन अग्रवाल ने जोगिया ब्लॉक प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में 14 जून को बैठक एवं मतदान के लिए तिथि निर्धारित की थी। जिसके संबंध में एसडीएम नौगढ़ डॉ. ललित कुमार मिश्र को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था। शुक्रवार को वह ब्लॉक में पहुंच कर अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में बैठक एवं मतदान के लिए क्षेत्र पंचायत सदस्यों का इंतजार किए, लेकिन कोई सदस्य नहीं आया। उन्होंने ब्लॉक में लगे लाउडस्पीकर से एलाउंस करके भी सदस्यों को बैठक एवं मतदान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद उन्होंने कार्रवाई समाप्त कर दी। अविश्वास प्रस्ताव असफल होने के बाद ब्लॉक प्रमुख सावित्री देवी एवं भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखा फोड़कर और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर हर्ष व्यक्त किया है।
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बड़े नेता की शह पर आया था अविश्वास प्रस्ताव
पंचायत चुनाव में भाजपा के टिकट पर जोगिया ब्लॉक प्रमुख पद हासिल करने वाली सावित्री देवी वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष की रिश्तेदार है। पंचायत चुनाव के बाद से ही भाजपा के एक बड़े नेता की शह पर कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने प्रमुख के विरूद्ध लामबंदी शुरू कर दी थी। ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल दो वर्ष पूरा होने के बाद इन सदस्यों ने डीएम के यहां अविश्वास प्रस्ताव संबंधी पत्र सौंपा था। क्षेत्र पंचायत सदस्यों की ओर से पहली बार सौंपे गए पत्र में त्रुटि होने के कारण डीएम पवन अग्रवाल ने उसे खारिज कर दिया था। जिसके बाद दूसरी बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का पत्र दिया, जिस पर बैठक व मतदान की तिथि निर्धारित की गई थी। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस समय भाजपा में गुटबंदी चरम पर पहुंच गई है। जोगिया प्रमुख के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव असफल होना एक खेमे की जीत है और दूसरे पक्ष को मात मिली है।