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Siddharthnagar News: पितृपक्ष आज से, 15 दिन नहीं होंगे मांगलिक कार्य

Fri, 29 Sep 2023 01:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। पितरों के प्रति आस्था निवेदित करने का पर्व पितृपक्ष आज से शुरु होगा। इस पक्ष के 15 दिन तक मांगलिक एवं नए कार्य नहीं होंगे। 14 अक्टूबर तक पितृ विसर्जन तक चलेगा। इस पक्ष में लोग तीर्थ क्षेत्र में पिंडदान कर पितरों का श्राद्ध करेंगे।
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ज्योतिर्विदों के अनुसार, 29 सितंबर को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और वृद्धि नामक योग है। इस दिन चंद्रमा की स्थिति शुभ ग्रह बृहस्पति की राशि मीन पर है इसलिए यह दिन पितरों को पूर्ण तृप्त करने वाला और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। वही 14 अक्टूबर को नक्षत्र हस्त और चंद्रमा की स्थिति कन्या राशिगत होन से श्राद्ध कर्म के लिए उत्तम है।
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श्राद्ध से चुकाया जाता है पितरों का ऋण
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के प्रतिपदा से 15 दिन पितृ पक्ष मनाया जाता है। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते है। और उनके पुण्यतिथि पर श्राद्ध करते हैं।
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पं. योगेंद्र शास्त्री के अनुसार, आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या या महालया कहते हैं, जो व्यक्ति पितृपक्ष के 15 दिनों तक श्राद्ध और तर्पण नहीं करते हैं, वे अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण कर सकते हैं।
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पितृपक्ष के मुख्य दिन
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य के अनुसार चौथ भरणी या भरणी पंचमी-गतवर्ष जिनकी मृत्यु हुई थै। उनका श्राद्ध इस तिथि पर होता है। मातृ नवमी अपने पति के जीवन काल में मरने वाली स्त्री का श्राद्ध इस तिथि पर किया जाता है। घात चतुर्दशी युद्ध में या किसी तरह मारे गए व्यक्तियों का श्राद्ध इस तिथि पर किया जाता है। अमावस्या के दिन सभी पितरों का श्राद्ध होता है। नानी-नाना का श्राद्ध आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को होता है। मघा नक्षत्र का भी बड़ा महत्व बताया गया है।
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ऐसे करें श्राद्ध तर्पण
पंडित सदाशिव मिश्रा के अनुसार सुबह स्नान के बाद पितरों का तर्पण करने के लिए सबसे पहले हाथ में कुश लेकर दोनों हाथ में जोड़कर पितरों का ध्यान करें, और उन्हें अपनी पूजा स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें। पितरों के तर्पण में जल, तिल और फूल अर्पित करे। इसके साथ ही जिस दिन पितरों की मृत्यु हुई है। उस दिन उनके नाम से पिंडदान पूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराके यथा शक्ति श्रद्धा से दान करें।
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