सिद्धार्थनगर। खरमास 14 मार्च से शुरू हो रहा है, जो एक माह तक रहेगा। इस बीच एक माह तक शादी विवाह व अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 13 अप्रैल के बाद कोई मांगलिक कार्य किया जा सकेगा।
14 मार्च को सूर्य दोपहर 12.36 बजे कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में जा रहे हैं। उदयतिथि के कारण 15 मार्च से एक माह तक खरमास रहेगा। इस मध्य कोई भी शुभ कार्य और विवाह आदि नहीं होंगे। ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज ने बताया कि जब सूर्य, गुरु की राशि धनु या मीन में आता है तो गुरु अस्त होने के कारण कोई भी शुभ कार्य करना अनुचित होता है। बृहस्पति के बलहीन होने के कारण एक माह कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इस माह सूर्य की मीन संक्रांति 15 मार्च को है जो 13 अप्रैल के बाद समाप्त होगी। साथ ही खरमास भी समाप्त हो जाएगा। खरमास से शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश के काम नहीं किए जा सकते हैं।
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खरमास में क्या करें
ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के मुताबिक खरमास में सूर्य गुरु की राशि में रहते हैं। इस संक्रांति में सूर्य मीन में रहेंगे। इस बीच सूर्य उपासना करनी चाहिए। प्रतिदिन तीन बार आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। एक बात याद रहे कि नित्य पूजा वैसे ही चलेगी। तीर्थ यात्रा भी कर सकते हैं। खरमास में अन्न दान का बहुत महत्व है। अन्न व वस्त्र का दान करें। पिता का प्रतिदिन चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें। गुरु का आशीर्वाद लें। गायत्री मंत्र का जप करें। इस समय गुरु भी मीन में ही गोचर कर रहा है। इसलिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं।
खरमास में यह न करें
- मुंडन संस्कार नहीं होते हैं।
- विवाह या कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा।
- बेटी या बहू की विदाई नहीं होती है।
- नवीन गृह प्रवेश नहीं होगा।
- किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान का शुभारंभ नहीं होगा।