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आईएसआईएस-अल कायदा के नेटवर्क की तलाश में गोरखपुर पहुंची NIA-ATS, भांजे से की लंबी पूछताछ

Wed, 08 Jul 2026 12:12 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

Raid in Gorakhpur: विदेश से जुड़े साइबर फ्रॉड मामले की जांच के सिलसिले में बुधवार तड़के करीब पांच बजे एटीएस व एनआईए की टीम ने तिवारीपुर क्षेत्र के इलाहीबाग स्थित माई धिया गढ़ही मोहल्ले में एक पेंट कारोबारी के घर छापा मारा।
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घर में एटीएस की टीम जांच के दौरान बाहर स्थानीय पुलिस की टीम भी मुस्तैद रही - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आतंकी संगठनों आईएसआईएस और अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) के ऑनलाइन नेटवर्क, हवाला और टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच अब गोरखपुर तक पहुंच गई है। बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने तिवारीपुर क्षेत्र के इलाहीबाग स्थित माई धीया गड़ही मोहल्ले में पेंट कारोबारी जलाल अहमद के घर पर करीब 12 घंटे तक तलाशी अभियान चलाया।

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सूत्रों के अनुसार, टीम ने पेंट कारोबारी जमाल अहमद के मकान को जांच के दायरे में लिया। बुधवार की भोर में ही टीम कारोबारी के घर पहुंची और जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि सीवान का रहने वाला कारोबारी का भांजा रह रहा था।

जांच एजेंसियाें को कारोबारी के भांजे के जेहादी संगठनों के नेटवर्क से जड़े होने के संकेत मिले थे, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान टीम ने दो लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, एक पेन ड्राइव और कई दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच की।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित वित्तीय लेन-देन की जानकारी खंगाली गई। शाम पांच बजे के करीब टीम अपने साथ लैपटॉप और कुछ अन्य दस्तावेज साथ लेकर गई है। दोनों से एजेंसियों के अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की। आरोपी के नाबालिग होने की वजह से एजेंसी उसे अपने साथ नहीं ले गई।

विजयवाड़ा में दर्ज हुआ था मामला
एनआईए के मुताबिक, यह मामला मार्च 2026 में विजयवाड़ा पुलिस की ओर से दर्ज किया गया था। इस केस में एजेंसी ने बुधवार को देश के 10 राज्यों में कुल 20 स्थानों पर एक साथ छापा मारा। इसमें गोरखपुर भी शामिल है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह नेटवर्क ऑनलाइन माध्यमों से आईएसआईएस और अल कायदा की विचारधारा का प्रचार कर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। एनआईए के मुताबिक, इस मामले में अब तक 11 आरोपियों और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया जा चुका है।

रात में की निगरानी
पेंट कारोबारी के घर हुई एनआईए और यूपी एटीएस की संयुक्त कार्रवाई अचानक नहीं हुई थी। जांच एजेंसियों ने कार्रवाई से पहले पूरे इलाके की कई घंटों तक गोपनीय निगरानी की और हर गतिविधि को बारीकी से परखा। सूत्रों के अनुसार, दोनों एजेंसियों की टीमें मंगलवार देर रात करीब 12 बजे ही इलाके में पहुंच गई थीं।

टीम के सदस्य पैदल और वाहनों से पूरे मोहल्ले का निरीक्षण करते रहे। इस दौरान कारोबारी के घर, मुख्य प्रवेश द्वार, आसपास के मकानों और आने-जाने वाले रास्तों की पहचान की गई। अधिकारियों ने बिना किसी स्थानीय व्यक्ति से संपर्क किए इलाके की स्थिति का आकलन किया और कार्रवाई की रणनीति तैयार की।

बुधवार सुबह करीब पांच बजे एजेंसियों ने पूरी तैयारी के साथ घर को चारों ओर से घेर लिया। इसके बाद टीम अंदर दाखिल हुई और तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षा के लिहाज से तिवारीपुर समेत अन्य थानों की पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। पुलिसकर्मियों को आसपास की छतों और मुख्य मार्गों पर तैनात किया गया, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

इलाके में रही हलचल
सुबह जब मोहल्ले के लोगों की नींद खुली तो बड़ी संख्या में पुलिस बल और केंद्रीय जांच एजेंसियों की मौजूदगी देखकर इलाके में हलचल मच गई। लोग कार्रवाई की वजह जानने के लिए उत्सुक नजर आए। दिन बढ़ने के साथ मोहल्ले में अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे साइबर ठगी से जुड़ा मामला बता रहे थे, जबकि कुछ अन्य गंभीर जांच से जोड़कर कयास लगा रहे थे।
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मामा के घर रह रहा था किशोर
जांच के घेरे में आया किशोर लंबे समय से अपने मामा के घर रह रहा था। उसका जन्म भी वहीं हुआ था। बताया जाता है कि उसके पिता इम्तियाज पहले अपने साले के काम में सहयोग करते थे लेकिन आर्थिक जरूरतों के चलते करीब एक साल पहले वह रोजगार की तलाश में बाहर चले गए।

इसके बाद किशोर अपनी मां के साथ मामा के घर रहने लगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेंट कारोबारी और उसका भांजा मोहल्ले में ज्यादा घुलते-मिलते नहीं थे। परिवार की महिलाएं भी पड़ोसियों से सीमित संपर्क रखती थीं।
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