करौंदा मसिना का सूना पड़ा धान क्रय केंद्र।
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सिद्धार्थनगर। धान खरीद शुरू हुए 42 दिन बीत गए हैं। 85 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के साथ आठ संस्थाओं के 71 क्रय केंद्रों पर शुरू हुई खरीद अभी 15 फीसदी भी पूरी नहीं हुई है। पूरे जिले में सिर्फ 13594 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका है। यह धान कुल 1996 किसानों से खरीदा गया। इसमें भी 7551 मीट्रिक टन धान अकेले खाद्य विभाग ने खरीदा है, जबकि 4319 मीट्रिक टन पीसीएफ ने खरीद की है। इनके अलावा अन्य संस्थाओं की खरीद प्रगति बेहद सुस्त है। खरीद संस्थाओं की दलील है कि क्रय केंद्रों पर किसान नहीं आ रहे, जबकि किसानों का साफ कहना है कि सरकारी केंद्रों पर उनका धान खरीदने में टालमटोल की जा रही है। कभी नमी अधिक होने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है तो कभी कोई अन्य कारण होता है। नतीजा मायूस किसान अपनी उपज को खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के मकसद से सरकार ने एक नवंबर से ही क्रय केंद्र स्थापित कर दिए थे। 1570 रुपये प्रति कुंतल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ 15 रुपये ढुलाई-सफाई के मद में भी दिया जा रहा है। बिक्री से पहले किसानों के अग्रिम पंजीकरण की भी व्यवस्था है, जिससे किसानों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े। इन तमाम कवायदों के बावजूद धान खरीद की सुस्त रफ्तार जिम्मेदारों के कार्यप्रणाली की पोल खोल रही है। सरकारी क्रय केंद्रों पर जहां सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं गल्ला व्यापारियों के यहां भीड़ लग रही है।
1100-1200 रुपये प्रति कुंतल पर भी किसान उन्हें धान बेचने में प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसा नहीं कि किसान अधिक मूल्य नहीं चाहते, मगर क्रय केंद्रों पर तरह-तरह के झाम व बार-बार टालमटोल के कारण उन्हें कम दाम में ही खाद बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला खाद्य विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय का कहना है कि खरीद को रफ्तार देने के लिए लगातार प्रयास जारी है। नमी वाला धान कैसे खरीद लें, जब मिलर उसे लेंगे ही नहीं। क्रय केंद्र तक आने वाले किसान का मानक के अनुरूप धान पूरी पारदर्शिता के साथ खरीदा जा रहा है। जिस धान में नमी है, उसे सूखाकर लाने को कहा जा रहा है। किसानों का कहीं उत्पीडन नहीं होने दिया जाएगा।