अमर उजाला में लाइव
गोशाला के पशुओं की अच्छी देखरेख करने की पड़ताल में मिली अव्यवस्था
उसका ब्लॉक की महरिया गोशाला में मृत मिले पांच पशु, अन्य कई बेदम दिखे, यही हाल डुमरियागंज के कान्हा गोशाला में भी दिखा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गोशाला में पशुओं की बेहतर देखभाल के प्रशासन के दावे बेदम साबित हो रहे हैं। यहां अव्यवस्था के चलते पशु कुपोषण का शिकार हो रहे और देखते ही देखते दम तोड़ दे रहे हैं। रविवार को गोशाला की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, वह प्रशासन के दावे की हकीकत बयां करने के लिए काफी है।
उसका ब्लॉक के महरिया गांव स्थित स्थायी गोशाला में पांच पशु मृत देखे गए। जबकि कई ऐसे पड़े थे, जिन्हें यह कह पाना मुश्किल था कि यह मृत हैं या फिर जीवित हैं। क्योंकि वे बेदम होकर पड़े थे। कुछ यही हाल डुमरियागंज की स्थायी कान्हा गोशाला में देखा गया। यहां भी तीन पशु दम तोड़ चुके थे, जबिक दो आखिरी सांसें गिन रहे थे। यह तो महज दो गोशालाओं का हाल रहा। अन्य में कैसी स्थिति होगी। इससे अंदाजा लगा सकते हैं।
छुट्टा पशुओं की बढ़ती हुए तादाद और किसानों की नष्ट होती फसल को उनके प्रकोप से बचाने के लिए सूबे की सरकार ने जिले में न्याय पंचायत स्तर पर स्थायी व अस्थायी गोशाला बनवाई। नगरीय क्षेत्र में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र में ईओ को संचालन की जिम्मेदारी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 70 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं बनाई गई थीं। मौजूदा समय में 60 से अधिक सक्रिय बताई जा रही हैं। इसमें तकरीबन सात हजार पशुओं रखा गया है। प्रशासन की ओर से पशुओं की बेहतर देखभाल, दवा और चारा दाना मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है।
दावे की सच्चाई जाने के लिए नगर से सटे उसका ब्लॉक क्षेत्र के महरिया गांव स्थित स्थायी गोशाला पहुंचे। यहां पर गोशाला साफ-सफाई चला, पहले शेड में पशु सूखा भूसा खाते हुए दिखे। एक कर्मी ने बताया कि साहब हौज खराब होने के कारण पानी गिर जाता है। इस वजह से नहीं डाले। आगे बढ़े तो महिला कर्मी गोबर हटा रही थी। उसके आगे वाली शेड में पशुओं के बीच पांच पशु मृत हाल में देखे गए। जबकि कई बेदम नजर आए, जिन्हें यह कह पाना मुश्किल था कि वे जीवित हैं या फिर मर चुके हैं। गोशाला में 200 पशु के होने की बात बताई गई। स्टोर रूम में भूसा और दाना पर्याप्त मात्रा में पाया गया। वहीं, परिसर में टैंक में पर्याप्त मात्रा में पानी था, जिस पशु पीते हुए दिखे। यहां कुल 10 कर्मी काम करते हैं, दो माह में केवल दो बार उन्हें मानदेय मिला है।
शाहपुर प्रतिनिधि के अनुसार शाहपुर स्थित गोशाला में कागजी आंकड़ों में 118 गोवंश पशुओं को रखा गया है। इन जानवरों की देखभाल और चारा खिलाने के लिए छह कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। मगर गोशाला में जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण जानवरों की स्थिति बेहतर होने के बजाय और भी बदतर हो रही है। जानवरों को निर्धारित मात्रा में ना तो भूसा ही खिलाया जाता है। दाना भी नहीं दिया जाता है। इस कारण गोशाला में आधा दर्जन से अधिक गायें कुपोषण की शिकार हो गई हैं। एक बछड़े की मौत और दो गायों की हालत काफी खराब है। ये कभी भी मर सकती हैं। दो गायें कमजोरी के कारण उठ नहीं पा रही हैं। इतना ही नहीं गोशाला में इतनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है कि मृत बछड़े की आंख कौवे नोच डाले हैं। अगर गोशाला की यही हालत रही तो एक-एक कर यहां मौजूद गायें कुपोषण की शिकार हो जाएंगी। जिससे उनकी मौत हो जाएगी। पूछताछ में कर्मचारियों ने बताया कि हरे चारा होता तो गायें और खातीं। सूखा भूसा और दाना कम खाती हैं।
बोले चिकित्सक
गोशाला में जाकर पशुओं की नियमित जांच और इलाज किया जाता है। कमजोर पशुओं के लिए निर्धारित प्रोटीन देने की सलाह भी दी गई है।
-डॉ. हरेंद्र प्रकाश, पशु अस्पताल डुमरियागंज
गोशाला में पशुओं के खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा और दाना स्टाॅक करवाया गया है। साफ-सफाई भी नियमित कराई जाती है। कुछ गंभीर रोग से ग्रस्त छुट्टे जानवर गोशाला आते हैं। इनको हम इलाज करा कर सही करने का प्रयास करते रहते हैं। इसमें कुछ जानवरों की मौत भी हो जाती है।
-महेश प्रताप श्रीवास्तव, ईओ नगर पंचायत डुमरियागंज
गोशाला में भूसा और दाना की व्यवस्था है। चिकित्सक भी तैनात किए गए हैं जो नियमित जाते हैं। गोशाला में पशुओं के मरने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-श्याम मुरली मनोहर मिश्र, बीडीओ उसका बाजार