डुमरियागंज। नगर स्थित बीआरसी परिसर में गुरुवार को महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की बैठक आयोजित हुई। इसमें 9 अगस्त को लखनऊ में हुए संघ के प्रदर्शन की सफलता पर चर्चा के साथ ही कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने 15000 व सहायिका को 7500 रुपये मानदेय किए जाने के साथ ही हौसला पोषण योजना के खाते से ग्राम पंचायत का हस्तक्षेप समाप्त किए जाने की मांग की। बैठक को संबोधित करते हुए संघ की जिलाध्यक्ष प्रभावती देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मचारियों के हक की लड़ाई के लिए 9 अगस्त को लखनऊ में प्रदेश व्यापी प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार को ताकत का एहसास करा दिया गया है। अगर बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड की तर्ज पर प्रदेश सरकार यहां भी आंगनबाड़ी कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय की घोषणा नहीं करेगी तो संघ सभी कार्यों का बहिष्कार करेगा। प्रभावती ने कहा कि गांवों में बच्चों को प्राथमिक ज्ञान देने के लिए केंद्र सरकार ने 1975 में शिक्षिका के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व उनके सहयोग के लिए सहायिकाओं की नियुक्ति की थी।
लगातार काम बढ़ाया जा रहा है, मगर उन्हें मानदेय के नाम पर दैनिक मजदूरों से भी कम पारिश्रमिक दिया जा रहा है। जिला संरक्षक मकबूल आलम ने कहा कि हौसला पोषण योजना प्रदेश सरकार की सराहनीय और महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन इसके संचालन के लिए खाते में ग्राम प्रधानों को सह संचालक बनाना योजना की पारदर्शिता पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है।
एकल खाता होने से योजना का क्रियान्वयन सुचारू रूप से होता। बैठक का संचालन महामंत्री किरन श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान अनीता, श्वेता, माला, नजबुन, राधिका, मीरा, नीलम, परमिला, निर्मला, किरन, माया, ऊषा, सरिता, शान्ती, कामिनी, नंदिनी, सीमा त्रिपाठी, लक्ष्मी, पुषावती, राजपति वमाज्, कलावती, मीना, आसमा खातून आदि मौजूद रहीं।