भीषण विस्फोट में घायल महिला और युवक ने बयां की तबाही की कहानी
जिला अस्पताल में चल रहा है दोनों का इलाज
श्याम सुंदर तिवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के नेपाल सीमा से सटे अलीगढ़वा कस्बे में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट में झुलसीं राबिया और इरफान का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। दिल दहला देने वाले हादसे का मंजर उनके दिलोदिमाग पर छाया हुआ है।
विस्फोट में झुलसीं राबिया पोते को खो देने से दुखी हैं। उनके आंसू नहीं थम रहे हैं। वहीं, कटरे में दर्जी का कार्य करने वाले इमरान का कहना है कि उन्हें बस इतना याद है कि करंट की तरह से कुछ आया और फिर होश में आया तो अस्पताल के बेड पर था। हादसे को याद करके वे सिहर जा रहे हैं।
क्षेत्र के अलीगढ़वा कस्बे में मंगलवार को हुए बम जैसे धमाके में घायल क्षेत्र के पोखरभिटवा गांव निवासी इमरान सिलाई का कार्य करते हैं। इमरान ने बताया कि कटरे में हमेशा चहल-पहल रहती है, मंगलवार को भी वही स्थिति थी। दोपहर के एक से डेढ़ बज रहे थे। वह सिलाई कर रहे थे। इसी बीच आग गोला आया और फिर क्या हुआ, मुझे जरा सा भी याद नहीं है। जब होश आया तो अस्पताल के बेड पर थे।
वहीं, दूसरे बेड़ पर पड़ीं राबिया पोते के खो देने के गम में बेड पर बिलख रही थीं। उन्होंने बताया कि पोते का खतना हुआ था। उसे दर्द था। इसलिए दवा लेने के लिए पहुंची थी। उसे पानी पिला रही थी कि तभी बहुत तेज धमाका हुआ और आग को गोला दीवार के टुकड़े सहित ऊपर आकर गिर गया। धधकती आग के बीच भगदड़ मच गई। इसमें सूफियान नजरों से ओझल हो गया। इसके बाद क्या-क्या हुआ। इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। यह कहते हुए राबिया फफक पड़ीं। परिजनों ने बताया कि अब भी उनके दिमाग पर विस्फोट का शोर छाया हुआ है।
वहीं, सामने वाला मकान जो हिलकर तबाह हो गया है। उसमें सिलाई करने वाले इंसान अली ने बताया कि हादसे के वक्त वह सामने वाले कटरे में अपनी दुकान में सिलाई रोककर नमाज अदा कर रहे थे। इसी बीच धमाके के साथ आग का गोला उठा। गंभीर रूप से घायल पुत्र इरफान और राबिया को लेकर किसी तरह से निकल पाए। तबतक आग पूरी तरह से भड़क चुकी थी। हर तरफ शोरगुल शुरू हो चुका था। धमाका इतना तेज था कि बाएं कान से कम सुनाई दे रहा है। अल्लाह का करम था कि इतने बड़े विस्फोट में वह सुरक्षित बच गए। आखिरी सांस तक यह धमाका कान में गूंजेगा और आंख के सामने तबाही नजर आएगी। यह कहते हुए इंसान अली की आंखें भर आईं। फिलहाल, दोनों की हालत में सुधार है। संवाद
चौथे लाश की पहचान नहीं, निजामुद्दीन के परिजनों ने किया इन्कार
अलीगढ़वा कस्बे में हुए विस्फोट में चार लोगों की जान चली गई है। इसमें तीन शवों की शिनाख्त हो गई थी। चौथे की पहचान नहीं हुई थी। लोग नेपाल निवासी निजामुद्दीन की लाश होने की बात कर थे। क्योंकि वह भी अलीगढ़वा कस्बे में आया था और धमाके के बाद से लापता है। बृहस्पतिवार के उसके परिजन पहचान करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन पहचान नहीं कर सके। निजामुद्दीन (35) पुत्र सहाबुद्दीन जिला कपिलवस्तु सुद्धोदन गाऊ पालिका वार्ड नंबर एक बगदी निवासी व्यक्ति अलीगढ़वा अग्निकांड के दिन अपने घर से आलू लेने आया था। घर वापस नहीं गया तो उसकी सास ने बुधवार सुबह निजामुद्दीन की नागरिकता लेकर अलीगढ़वा रेस्क्यू में तैनात अधिकारियों से मिलीं। उसके बाद लाश पहचान कराने की बात कही। सास और फूफा व अन्य लोग शव पहचान के लिए गए। लेकिन लाश को पहचान नहीं पाए। उन्होंने निजामुद्दीन होने से मना कर दिया। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को उसके पिता सहाबुद्दीन और फूफा के साथ अन्य लोग भटकते मिले। उन्होंने बताया कि मेरा बेटा नहीं मिल पा रहा है। वह थोड़ा मंद दिमाग का है। उसके पास 10 हजार से अधिक रुपये हैं। वह मुंबई चला गया कि कहां गया, पता नहीं चल पा रहा है। लाश पूरी तरह जल गई है। पहचान नहीं हो पा रही है। साहब डीएनए टेस्ट करवा दो, बहरहाल, अभी शिनाख्त नहीं हुई। संभावना जताई जा रही है कि पुलिस को अज्ञात में शव दफन कर डीएनए जांच करानी पड़ सकती है।
विस्फोटक पर बसता है अलीगढ़वा कस्बा
सिद्धार्थनगर। अलीगढ़वा कस्बे के कटरे में हुई विस्फोट की घटना की हर तरफ चर्चा हो रही है। चंद कदम दूरी पर बाॅर्डर के उसपार नेपाल में धमाके को लेकर कुछ अलग ही चर्चा चल रही है।
चाकरचौड़ा कस्बे की पान की गुमटी पर 80 वर्ष के समीउल्लाह एक युवक से कहते दिखे के यहां विस्फोट होना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है। क्योंकि माओवाद के समय से इसी कस्बे से माओवादी विस्फोटक लेकर जाते थे। वहां पर कुकर बम, हाथगोला बनाकर फेंक देते थे। जिससे न जाने कितने घर तबाह हो गए और न जाने कितने लोगों की जानें गईं। उनके घरों को लूटा गया। हो सकता है कि बारूद का ढेर लगाकर पटाखा बनाने का कार्य चल रहा हो। क्योंकि पटाखा खरीदने के लिए लोग वहीं जाते थे। चाहे भारतीय हो या फिर नेपाल के लोग। कहा कि अलीगढ़वा कस्बा माओवाद के समय से ही विस्फोटक पर बसता है, यह कहना गलत नहीं।
वहीं, दूसरे ने कहा कि यहां से शादी-विवाह के साथ ही दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा में भी लोग पटाखे खरीदने जाते थे। इसमें स्थानीय प्रशासन की चूक है जो कई साल बाद भी इस धंधे को रोक नहीं पाया है। या जानते हुए रोकने की कोशिश ही नहीं की।
असीरुद्दीन के घर से मिले हैं अहम सुराग
जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम ने ठकुरापुर गांव निवासी आरोपी मकान मालिक असीरुद्दीन के घर पर रात में छापा मारा है। सूत्रों के मुताबिक, आलमारी और अन्य स्थानों से उसे अहम चीजें हाथ लगीं। इसके बाद पुलिस टीम ने उसके खिलाफ गैरइरादतन हत्या और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। बताया जा रहा है कि दो बार छापा मारने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। अभी इस मामले में और चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है। हालांकि, अधिकारी छापा मारने की बात से इन्कार कर रहे हैं।
बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटा
बम जैसा विस्फोट होने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा दहल गई थी। इस घटना के बाद से कस्बे के लोग दहशत में हैं। बृहस्पतिवार तीसरे दिन भी अधिकतर दुकानें बंद रहीं। हर तरफ सन्नाटा था। कहीं-कहीं लोगों का समूह दिखा जो घटना के बारे में ही चर्चा कर रहा था। कुछ दुकानें खुलीं तो लोगों ने जरूरत के सामान खरीदे। हर आंखों में गम और चेहरे पर मायूसी साफ झलकती नजर आई।
देर रात गई एटीएस और बम निरोधक दस्ता
धमाके वाली रात पहुंची एटीएस और बमनिरोधक दस्ते ने लगभग 24 घंटे सर्च अभियान चलाया। बुधवार देर रात टीम ने अपनी जांच पूरी की। घटनास्थल से कई सैंपल संकलित किए। इसके बाद दोनों टीमें निकल गईं। सूत्रों के मुताबिक, इनके हाथ विस्फोटक होने के अहम तथ्य लगे हैं। इससे बड़ा खुलासा हो सकता है।
नेपाल में लावरिस हाल में मिला पटाखा
नेपाल के माया देवी गाऊ पालिका वार्ड नंबर चार ठकुरापुर के पास से बुधवार रात सात झोले में रखे तीन लाख रुपये से अधिक के पटाखे लावारिस अवस्था में नेपाल पुलिस ने बरामद किया है। बरामद पटाखे कहां से आए और कौन छोड़कर गया। इसके बारे में पुलिस छानबीन कर रही है।