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Siddharthnagar News: जहरीली हुई हवा...160 पहुंचा एक्यूआई

Sun, 03 Nov 2024 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। मौसम की नरमी और दीपावली पर दो दिन जले पटाखों विषैला धुआं हवा में घुलने से प्रदूषण बढ़ गया है। सुबह जहां दृष्यता 200 मीटर रही। वहीं, नमी और प्रदूषण के कारण पूरे दिन धुंध जैसा बना रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक्यूआई 160 पर पहुंच गया है जो दो दिन पहले 129 था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 100 के ऊपर एक्यूआई का पहुंचना बच्चों बुजुर्गों और सांस के रोगियों के लिए खतरनाक माना जाता है।
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शुक्रवार को नवंबर माह लगने का एहसास हो गया। धुंध की मोटी चादर के कारण देखने में लोगों को परेशानी हुई। यह हालात सुबह 10 बजे तक रहा। पूरे दिन धुंध बना रहा है, जिससे लोगों को असहजता महसूस हुई। मौसम में नरमी और दो दीपावली पर दो दिन में 200 क्विंटल से अधिक पटाखा जलने के बाद उससे निकलने वाले विषैले धुंआ घुल गया है।
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में धान की कटाई और मड़ाई का भी काम शुरू गया है। इससे धूल और गुब्बार उठ रहे हैं और हवा में नमी होने के कारण वह एक परत जैसा बना रहा है। धुंध का असर सबसे ज्यादा असर हाईवे के ओवरब्रिज और अशाेक मार्ग पर देखा गया।
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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में 24 घंटे में पहुंचे 16 सांस के रोगी : प्रदूषण का असर सेहत पर किस प्रकार से पड़ रहा है, इसकी हकीकत जानने के लिए शनिवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। इमरजेंसी में 24 घंटे में 16 सांस के मरीज पहुंचे थे। कुछ घंटे ऑक्सीजन पर रखने के बाद सुधार हुआ तो दवा देने के साथ ही एहतियात बरतने, सुबह और शाम को कम निकलने और निर्माण स्थल या जहां धूल उड़ रहे हैं कम जाने की सलाह और मास्क लगाने की सलाह देकर भेज रहे हैं।
वहीं, ओपीडी में सांस और सीने में जलन के रोगी बढ़े हैं। पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन 5 से 10 रोगी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नमी बढ़ने से धूल के कारण धुंध छा रही है। इधर और हालात बिगड़ सकता है। क्योंकि तापमान में गिरावट से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। उनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाने के कारण हवा प्रदूषित होती जाती है।
अभी और बिगड़ेगी हवा की गुणवत्ता : दीपावली पर कम से कम 200 क्विंटल पटाखा जला होगा। क्योंकि पांच तहसीलों पर 350 अस्थायी दुकान और 22 स्थायी दुकानें लगी थीं। इसके साथ ही गांव और कस्बों में दुकानों पर बड़ी मात्रा में पटाखा रखा हुआ था, जिसकी ब्रिकी हुई और लोगों ने जलाया। इस पटाखे की धुंआ का असर रहा कि 31 अक्तूबर को एक्यूआई 129 था, जो महज दो दिन में यानी शनिवार को 160 पर पहुंच गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि धान की मढ़ाई और फसल अवशेष जलने के बाद यह आंकड़ा पार करके 200 तक पहुंच जाएगा। जो सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदेह होगा।
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