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Siddharthnagar News: आतिशबाजी से जहरीली हुई हवा, बिगड़ने लगी सेहत

Tue, 14 Nov 2023 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। दिवाली और परेवा की रात हुई आतिशबाजी ने शहर की हवा को जहरीली कर दी है। हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। आतिशबाजी के दौरान कुछ लोगों को अस्पताल जाना पड़ा। तो बीमार लोगों ने आबादी से दूर सुनसान स्थान पर दो से तीन घंटे का समय बिताया।
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शहरी क्षेत्र में दिवाली की देर रात तक पटाखे की धमक और धुएं के कारण खिड़की खोलकर सोने वाले लोगों ने दरवाजे बंद कर दिया। पटाखे की आवाज से नींद टूटती रही। इसमें बीमार लोगों को ज्यादा तकलीफ हुई है। जितना अधिक पटाखे जले, उतनी ही हवा खराब हुई। दिवाली के दूसरे दिन सोमवार को भी शहर के वन विभाग कॉलोनी, इंदिरानगर, भीमापार और पुरानी नौगढ़ में पटाखे की आवाज से दिल की धड़कनें बढ़ती रहीं। दिवाली से एक दिन पहले शहर में हवा में प्रदूषण पीएम-10 का स्तर 160 दर्ज किया गया था। जो मंगलवार को बढ़कर 173 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम-10 की मात्रा 100 से अधिक होना सेहत के लिए हानिकारक होता है। रसायन विज्ञान के असिस्टेंट प्रो. डॉ. विनोद सिंह ने बताया कि हवा में पीएम-10 यदि 80 से अधिक होता है तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बन जाता है।

वन विभाग कॉलोनी निवासी रीता देवी ने बताया कि दो मंजिला मकान के ऊपर कमरे में सो रही थी। पटाखे के धुएं से परेशानी होने लगी। तो खिड़की बंद कर दिया। इसी कॉलोनी में रहने वाली महिला का ऑपरेशन हुआ है। उन्होंने युवकों से दूर पटाखे जलाने की बात कही। युवक मान तो गए लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। दिवाली की रात में वातावरण में धुआं से आंखों में जलन शुरू हो गई।
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छह लोगों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
आतिशबाजी के कारण मंगलवार तक दो दिन में श्वास के छह मरीजों को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करना पड़ा।वहीं, निजी अस्पतालों में भी मरीजों का इलाज किया गया। एक निजी अस्पताल में हृदय रोग से पीड़ित 20 लोग इलाज कराने पहुंचे। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जावेद आलम ने बताया कि तेज आवाज और धुआं के कारण हृदय रोग के मरीजों की तकलीफ बढ़ गई। इन कारणों से सामान्य मरीजों को दिक्कत होती है, जबकि हृदय रोगियों की दवा की खुराक समायोजित करने की नौबत आ रही है।

श्वास रोगियों की बढ़ी समस्या
वातावरण में धुएं की मात्रा बढ़ने से श्वास के पुराने रोगियों को तकलीफ बढ़ गई। दिवाली के बाद मंगलवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक हो गई। चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि श्वास नली में धुआं अंदर चिपकता है तो नली सकरी हो जाती है और तकलीफ ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को धुएं वाले स्थान से दूर रहना चाहिए।
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धुएं से निकलने लगा आंख से पानी
धुआं के कारण आंखों में दिक्कत हुई मंगलवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 45 मरीज पहुंचे। आंखों में नमी सूखने के कारण जिन मरीजों को ड्राई आई की दवा चलती है, उनकी समस्या बढ़ गई। आंखों में जलन, पानी आना और दर्द की समस्या के कारण लोगों को डॉक्टर के पास जाना पड़ा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि ड्राई आई के मरीजों को धुआं से बचना चाहिए। अधिक धुआं के कारण ऐसे मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है।
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जानिए, इनकी तकलीफ
पति के साथ आ गई पुल पर
उसका बाजार की रहने वाली निर्मला देवी ने बताया कि उनकी आंख का इलाज चल रहा है। पटाखे जलने शुरू हुए तो वह अपने पति के साथ पुल पर आ गईं और दो घंटे बाद वापस गईं।

कमरे में बंद हैं ताकि कम आवाज आए
सरोजिनीनगर के व्यापारी घनश्याम दास अग्रवाल ने बताया कि उनका हृदय रोग की दवा चलती है। पटाखे जलने शुरू हुए तो उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया था ताकि आवाज और धुआं का असर कम हो।

बचाव के लिए घर से गए दूर
शोहरतगढ़ के सिसवा निवासी रफीक अहमद ने बताया कि उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई है। पता था कि त्योहार में पटाखे जलेंगे तो वे घर से कुछ दूर स्थित दुकान पर चले गए थे, जहां कुछ राहत रही।
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