सूखे से धान की फसल मुरझा कर सूखने लगी है।
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बाढ़ और बरसात के बाद अब तीखी धूप फसलों पर कहर ढा रही है। बारिश के अभाव में धान की फसल मुरझा कर सूखने लगी है। किसानों को कोई उपाय नहीं सूझ रहा। खेतों में पड़ रही दरारों को देखकर किसान छाती पीटने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि तिहाई से भी कम फसल बाढ़ का पानी हटने के बाद बची है। इस पर सूखे की मार है। अब खाने भर का अनाज मिलने की उम्मीद भी मिट रही है।
करीब एक माह पहले राप्ती के कहर से जहां सैकड़ों गांव के सीवान जलमग्न हो गए थे। वहीं, रही सही कसर बरसात के पानी ने पूरी कर दी थी। सीवान में डूबी अपनी फसलों को देख किसानों का कलेजा बैठ रहा था। बाढ़ का पानी जब कम हुआ और खेतों में अवशेष फसलों को देख किसानों में उम्मीद जगी कि कम से कम पेट पालने भर का अनाज वह पैदा कर लेंगे। क्षेत्र के सेमरा बनकसिया गांव के किसान प्रहलाद व उनके तीन भाइयों ने संयुक्त रूप से करीब 15 बीघा धान की खेती थी। मगर बाढ़ के पानी से उनका साढ़े तेरह बीघा फसल गल गई।
बची डेढ़ बीघा फसल अब सूखे की मार झेल रही है। प्रहलाद ने बताया कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि अब क्या करें?
खेती में व्यय पूंजी की वापसी तो दूर उनके घर के लोगों के खाने को अनाज तक नहीं मिल पाएगा। अंदुआ शनिचरा गांव के किसान चंद्रभूषण पांडेय, श्रीनिवास, पप्पू, महात्मा, अरुण कुमार आदि ने बताया कि गांव के दक्षिण सीवान की फसलों को तो बाढ़ और बरसात के पानी ने खा लिया। बाकी बचे पूरब के सीवान को तीखी धूप सूखा रही है। अगर दो तीन दिनों में बारिश नहीं हुई तो वहां की भी फसल पूरी तरह से सूख जाएगी। इसी तरह क्षेत्र के तेतरी, बिजवार बढ़ई, पडिय़ा, हिजुरा, मन्नीजोत, महनुआ, महतिनियां, हरनाखुरी, सरौथर कठौतिया सहित दर्जनों गांव मेें धान की फसल सूख रही है। खेतों में दरारें पड़ते देख किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें दिखाई पड़ने लगी है।